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October 7, 2026 12:32 pm

कर्म और शिल्प के सम्मान का पर्व, 17 को सजेगा विश्वकर्मा पूजा का दरबार।

गैराज से पावर ग्रिड तक तैयारी अंतिम चरण में, बाजार में पूजा सामग्री की बढ़ी मांग।

पाकुड़। देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा को लेकर पाकुड़ में उत्साह चरम पर है। 17 सितंबर को होने वाली विश्वकर्मा पूजा को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। सरकारी और निजी प्रतिष्ठानों, गैराज, वर्कशॉप, ट्रांसपोर्ट प्रतिष्ठानों, बस स्टैंड, पावर ग्रिड समेत विभिन्न संस्थानों में साफ-सफाई, रंग-रोगन और पूजा पंडाल सजाने का काम तेजी से चल रहा है। विश्वकर्मा पूजा को मेहनत, हुनर और तकनीक के सम्मान का पर्व माना जाता है। इस दिन कारोबारी और कामगार अपने औजार, मशीन, वाहन और कार्यस्थल की विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कई जगहों पर मशीनों की सफाई और ग्रीसिंग कर उन्हें पूजा के लिए तैयार किया जा रहा है। बाजार में बढ़ी रौनक
पूजा को लेकर पाकुड़ के बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ गई है। भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर, माला, प्रतिमा सजावट सामग्री, रंग-बिरंगे स्टीकर, बिजली की झालर और पूजा सामग्री की बिक्री तेज हो गई है। फूल दुकानों पर गेंदा, गुलाब और सूरजमुखी समेत विभिन्न फूल उपलब्ध हैं। दुकानदारों के अनुसार, पूजा नजदीक आने के साथ खरीदारी में और तेजी आने की उम्मीद है।
विश्वकर्मा पूजा केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। यह उन सभी लोगों के लिए महत्वपूर्ण पर्व है, जो अपने श्रम, हुनर, औजार और तकनीक के सहारे आजीविका चलाते हैं। यही कारण है कि इस पर्व को ‘कर्म और शिल्प के सम्मान’ के रूप में विशेष पहचान मिली है।

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