:–रेल विजिलेंस के द्वारा कोल कंपनी को लगाया गया जुर्माना ऊंट के मुंह में जीरा समान
:–कोल कंपनी के इशारे पर पाकुड़ शासन-प्रशासन?????
बजरंग पंडित पाकुड़।
पाकुड़: पाकुड़ के आमड़ापाड़ा क्षेत्र के विभिन्न कोयला खदानों में कोयले के परिवहन में लगे ओवरलोड वाहनों पर स्थानीय पुलिस तथा यातायात विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।जिससे यह ओवरलोड वाहन दो पहिया वाहनों के साथ ही अन्य राहगीरों की जान को आफत में डाल रहे है।नियमित रूप से ओवरलोड कोयला परिवहन करने वाले इन वाहनों पर यातायात विभाग तथा स्थानीय पुलिस की नजर नहीं पड़ रही है। जबकि दूसरी ओर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत डीटीओ और पुलिस सिर्फ छोटी वाहनों तक चेकिंग अभियान और चालानी कार्रवाई सीमित रह गई है।विदित हो कि कोयला खदान से सड़क मार्ग होते हुए लोटामारा तक ओवरलोड कोयला परिवहन कर रहे यह वाहन अपनी निर्धारित क्षमता से अधिक मात्रा में कोयले का परिवहन करने से गुरेज नहीं करती। यह बात कॉलरी प्रबंधन से लेकर ट्रक ऑपरेटर और पुलिस भी जानती है।इन्हीं ओवरलोड वाहनों से जहां एक और अनियंत्रित होने से दुर्घटनाएं हो रही हैं वहीं दूसरी ओर सडक़ भी इनके आवागमन से जर्जर हो रही है।जिस पर कार्रवाई नहीं होने से यह वाहन बेखौफ संचालित हो रहे हैं।जिला प्रशासन भी इन सभी जानकारियों से परे नहीं है सभी को मालूम है की अवैध तरीके से कोयले की परिवहन की जाती है पर शासन प्रशासन पता नहीं किस गहरी नींद में सोई हुई है।साथ ही जबसे पचुवाड़ा कोल माइंस अलुबेड़ा से बीजीआर कंपनी, डीबीएल द्वारा कोयला परिवहन कर पाकुड़ रेलवे साइडिंग तक लाया जाता है,तबसे रोड के आस-पास गांव के रहने वाले ग्रामीणों के लिए मुसीबत का सबब बनता गया।पचूवाड़ा कॉल ब्लॉक से लाया जा रहा कोयला ग्रामीणों के जीवन पर विपरीत असर डाल रहा है। कभी धूलकण से तो कभी सड़क दुर्घटना से आसपास के लोग भयभीत हैं। ग्रामीण मर मर के जीते हैं। इस पर भी शासन-प्रशासन की नजर नहीं जाती है। सारा जिला प्रशासन ने अवैध पत्थर बिना माइनिंग के जिला से ना निकल जाए इसके लिए जिले भर के चारों ओर नाकाबंदी व चेक पोस्ट बनाया गया है। कुछ अस्थाई चेकपोस्ट तो हाल ही में बनाया गया है। तकदीर बिना माइनिंग चालान के कोई मच्छर भी जिला से बाहर ना निकल सके। वही कॉल कंपनी के लिए कोई चेक पोस्ट नहीं है कोल कंपनी कुछ निचले तबके के अधिकारी को सांठगांठ कर अपने मनमानी तरीके से कोयला उत्खनन व परिवहन करवाती है। मुखबिरों के माध्यम से पता चला है कि जब कोयला डंपर खदान से निकलकर कोल कंपनी के कांटा में वजन कराने आती है तो उनको सिर्फ वजन का स्लिप दिया जाता है। उनको किसी भी प्रकार की माइनिंग चालान नहीं दी जाती है। डंपर के ड्राइवरों ने यह भी बताया कि एक माइनिंग चालान में 2 से तीन ट्रीप कोयला का परिवहन भी की जाती है। अगर माइनिंग विभाग व परिवहन विभाग हरकत में आकर कार्यवाही में उतर गए हैं तो कोयला कंपनी पर पता नहीं कितना जुर्माना व कितना केस होगा। अमड़ापाड़ा से पाकुड़ तक सड़क मार्ग में कुल 4 थाना क्षेत्र आता है जिसमें नगर थाना में कोयला चोरी को लेकर गरीब से गरीब तबके के लोगों पर ज्यादा केस हुआ है। अब सवाल यह उठता है कि जब छोटी छोटी साइकिल व व्हीलचेयर में 20 केजी कोयला चोरी करने वाले को जेल हो सकती है तो डंपर से डंपर, मालगाड़ी से मालगाड़ी में ले जा रहे अवैध कोयले कंपनी इतना सुरक्षित क्यों है। आखिर कॉल कंपनी व कोयला ढोने वाले डंपरो पर जिला प्रशासन का कोई नियम लागू होता क्यों नहीं दिखाई दे रहा है। ओवरलोड हाईवा वह भी पोलूशन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना त्रिपाल के अमलापाड़ा से पाकुड़ तक सड़कों में दौड़ती हुई दिन-रात नजर आते हैं। अब निश्चित है कि इस खबर को प्रकाशित करने के बाद भले ही प्रशासन हरकत में आए और हरकत में आकर थोड़ी बहुत खानापूर्ति कर ले। लेकिन यहां समस्या का समाधान नहीं है जबकि सरकार की राजस्व को क्षति पहुंचाने वाले पर जिला प्रशासन का डंडा चलना लाजमी है। बताते चलें कि बिते 22 मार्च की शाम पाकुड़ के लोटामारा स्थित कोयला रेलवे डंपिंग स्थल से दिलिप बिल्डकोन लिमिटेड कंपनी की ओर से पंजाब स्टेट पॉवर कॉपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को पंजाब गुरुनानक थर्मल पावर भटिंडा के लिए कोयला लोड कुल 59 वैगन भेजा जा रहा था। रवाना होने के पूर्व स्थानीय रेलवे के संबंधित विभाग के अधिकारियों को क्षमता से अधिक कोयला लोड किए जाने की भनक लगी। जिसके बाद कायला लदे रैक की मापी कराया गया। मापी के दौरान कोयला क्षमता से अधिक पाया गया।उस पर करीब 35 लाख रुपए की जुर्माना की प्रावधान का प्रक्रिया भी चल रही थी। अब यहा
भी सवाल उठ रहा है की पाकुड़ जिला से कोयला लदा मालगाड़ी बेहद तरीके से पाकुर से बाहर चली जाती है तो उसका जांच कहीं पर नहीं किया गया उसका जांच साहिबगंज जिला में हुआ। बहरहाल चर्चा यह है कि कोल कंपनी की हर बात जिले के आला अधिकारियों को मीठी लगती है और आम नागरिकों का बात तीखी खट्टी व कड़वी लगती है।
अमरापाड़ा में खनन कर रही दो कोल कंपनी जिनमे से एक कंपनी का कोयला दो जिले में ट्रांसपोर्टिंग हो रहा है,एक जिले में अमरापाड़ा से दुमका अंडर लोडिंग और अमरापाडा से पाकुड़ ओवर लोडिंग यह कैसे संभव है कंपनी एक नियम अलग अलग







