प्रशांत मंडल
एतिहासिक सिंगारसी गाँव में अमर शहीद जवरा पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी की प्रतिमा का अनावरण शिवचरण मालतो महासचिव, बैधनाथ पहाड़िया समाज सेवी, रामकुमार पहाड़िया मुख्य सलाहकार सह सेवा निवृत्त वायुसेना के कर कमलों द्वारा मुख्य प्रवक्ता कमलेश्वर पहाड़िया, केन्द्रीय उपाध्यक्ष सोबनी पहाड़िन, विश्वनाथ भगत सेवा निवृत्त वायुसेना, मानोज भगत समाज सेवी तथा ग्राम प्रधान गणेश पहाड़िया, दिलीप पहाड़िन समाज सेवा,सरदार जमुना पहाड़िया,सरदार जामा पहाड़िया,सरदार जबड़ा पहाड़िया,सरदार सुकदेव देहरी,सरदार नारना पहाड़िया,नायब की उपस्थिति में गुरिल्ला युद्द कौशल स्थल सवालक पहाड़ कुशो पहाड़ का भी अनावरण किया गया। संपन्न हुआ। तत्कालीन भागलपुर प्रमंडल के एतिहासिक सिंगारसी पहाड़ी ( वर्तमान संताल परगना प्रमंडल गोड्डा जिला,प्रखंड- सुंदर पहाड़ी) गड़गामा गाँव में 11 फरवरी 1750 ईo में हुआ था। इनका मुल नाम जवरा पहाड़िया है और पुकारू नाम से प्रसिद्द हो गए तिलका माझी । यह आदिमानव मुल निवासी आदिम जनजाति पहाड़िया हैं। इनका युद्द कौशल क्षेत्र बड़ा पालमा,टोंगा पहाड़, पोरआनी,सिंगारसी पहाड़ में अनेकों हत्यार और चिन्ह मिलें हैं। विश्व स्तरीय वीर लड़ाका में तिलका मांझी का नाम दुसरे स्थान पर और भारत का प्रथम स्वतंत्रता सेनानी है। 1782 ईo में ततकालीन भागलपुर प्रमंडल के अन्ग्रेजी हुकुमत के प्रथम कलेक्टर लॉड आगस्टस क्लीवलैंड की अध्यक्षता में गठित ” हिल रेंजर्स ” के सेनापति थे। तिलका माझी वीर ही नहीं महान ज्ञानी और विद्दवान थे इसलिए तानाशाह शासन की चपलुसी को अविलम्ब जानकर जवरा पहाड़िया ने आगस्टस क्लीवलैंड को तीर का निशाना बनाया और सदा के लिए मौत की गहरी नीन्द में डालने वाला जवर पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी ही थे। भारत की पहली घटना से तिलमिलाई अन्ग्रेजी हुकुमत ने तिलका माझी की तलासी शुरु की और घने जंगल बड़ा पालम गाँव में पकड़ा और दो पेड़ के बीच में बांधकर टाँगा था। पश्चात 4 घोड़ों में बान्ध कर जमीन में घसीटते हुए लहुलहान कर भागलपुर कारागार में पहुँचाया गया। एक साल तक बीना अन्न पानी के कठोर प्रताड़ना दी गई । अन्त में 13 जनवरी 1785 ईo को भागलपुर के एक बरगद पेड़ में खुले आम फंसी तथा मौत की सजा दी गई थी। उस चौक का नाम सदा के लिए तिलका माझी चौक हो गया। न्याय शासक ने जवरा पहाड़िया उर्फ तिलका मांझी की अंतिम इच्छा पुछा कि तिलका माझी ने कहा कि पहाड़िया धरती की आजादी, स्वायत्तता, संरक्षण और इनकी प्रसिद्द गीत थी – हंसी- हंसी चढ़बो फंसी, पहाड़ जंगल नाहिँ चढ़बो । अमर शहीद जवरा पहाड़िया उर्फ तिलका माझी को नमन करते हुए समर्पित।










