राजकुमार भगत
नवरात्रि में 2 वर्ष से 10 वर्ष की कन्याओं का होता है विशेष पूजन
पाकुड़। 23 अक्टूबर को शारदीय नवरात्रि की नौवे व अंतिम दिन महानवमी की पूजा अर्चना पूरी विधि विधान और मंत्रो उच्चारण के साथ की गई। नवरात्रि में माता के नौवे दिन देवी दुर्गा के नवे स्वरूप सिद्ध रात्रि की उपासना और आराधना विधि विधान के साथ की गई । नवरात्रि में नवमी के दिन विशेष कन्या पूजन का लगभग सभी पूजा पंडालों और हिंदू परिवारों के बीच किया गया। कुछ लोग अष्टमी को तो कुछ लोग नवमी को कन्या पूजन करते हैं । धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के नवमी तिथि को मां सिद्ध रात्रि की विधिवत पूजा करने से धर्म बाल यश के साथ-साथ सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है ।इस दिन मां दुर्गा की सिद्धिरात्रि स्वरूप की पूजा अर्चना और पाठ करने व कुमारी कन्याओं का पूजन एवं भोजन का विशेष महत्व है। सिद्धरात्रि की पूजन के पश्चात कुमारी कन्या पूजन धूप दीप फल फूल से निवेदन की गई।
कुमारी पूजन
मां सिद्धरात्रि की पूजन के पश्चात माता के नौ स्वरूप अर्थात नौ कुमारी कन्याओं को पूजन एवं भोजन का विधान है । इस निमित्त दुर्गा पूजा स्थल ब नवरात्रि करने वाले भक्त एवं अन्य अन्य परिवार द्वारा माता के 9 स्वरूप 2 वर्ष से 10 वर्ष की 9- 9 बच्चियों पूजा अर्चना की गई। कन्याओं के पांव पखारे गए। फिर उन्हें चुनरी तिलक रक्षा सूत्र आदि से पूजन कर शुद्ध घी से बने हलुवा, खीर पूड़ी ,चना आदि का भोग लगाया गया एवं सम्मान स्वरूप उपहार दिया गया एवं उनका आशीर्वाद ग्रहण किया गया।









