पहाड़ों में आग लगने, पर्यावरण के साथ छेड़ छाड़ के कारण जड़ी-बूटी हो रहे हैं नष्ट : सनीफ अंसारी
राजकुमार भगत
पाकुड़,। जिला अन्तर्गत लिट्टीपाड़ा प्रखंड के मध्य विद्यालय, लिट्टीपाड़ा में जनजातीय वैद्य संघ के गठन को लेकर एक आवश्यक बैठक आहूत की गई। बैठक में आयुर्वेदिक चिकत्सा पद्धति के प्रचार प्रसार, हर्बल गार्डन का निर्माण, एवं वैध संघ का नामकरण एवम रोगियों के विवरण संधारण पर विस्तृत रूप से चर्चा किया गया । परंपरागत जनजातीय वैद्य संघ की बैठक में पिरामल स्वास्थ्य के संथाल परगना के प्रमुख तुहिन बनर्जी ने कहा की इस परंपरागत चिकित्सा पद्धति का प्रचार प्रसार अधिक से अधिक होना चाहिए और चिकित्सकों को प्रति माह एक निश्चित कमाई भी होनी चाहिए। जिससे की उन्हे अपने परिवार के भरण- पोषण के लिए कठिनाई का सामना ना करना पड़े। साथ ही साथ बैठक के दौरान इस चिकित्सा पद्धति के विस्तार, रेफरल प्रणाली का निर्धारण, हर्बल गार्डन का निर्माण एवं जनजातीय वैद्य संघ का गठन एवं नामकरण पर भी सर्वसम्मती से निर्णय लिया गया । लिट्टीपाड़ा आदिवासी जड़ी बूटी चिकित्सा संघ नाम रखा गया ।बैठक में संघ द्वारा निर्णय लिया गया कि मासिक बैठक प्रत्येक माह के चौथे सोमवार को होगा । वही इस मौके पर पिरामल स्वास्थ्य से अनामय: आदिवासी स्वास्थ्य सहयोग कार्यक्रम के पाकुड़ जिला समन्वयक मो सनीफ अंसारी ने कहा की पतझड़ के मौसम में अधिकतर पहाड़ों में आग लगने और पत्थर व्यवसाय के वजह से कीमती कीमती जड़ी बूटियां नष्ट होती जा रही है जिसकी संरक्षण जरूरी है।
बैठक में आए जड़ी बूटी उपचार कर्ता आलमा किस्कू बरनावस मुर्मू, सूर्यनारायण मलतो , जबरा पहाड़िया एवम मंडल मरांडी द्वारा कहा गया हम सभी रेफरल प्रणाली का निर्धारण, रजिस्टर का संधारण एवम हर्बल गार्डन/ न्यूट्री गार्डन का निर्माण करेंगे जिसमे पिरामल सहयोग करेगी।इस अवसर पर अन्य आदिवासी चिकित्सक स्टीफेन हंसदा, आलमा किस्कू, जबरा पहाड़िया, बरनावास मुर्मू , सूर्यनारायन मलतो एवम और भी कई जड़ी बूटी उपचारकर्ता उपस्थित थे।








