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May 12, 2026 7:47 am

हर्षोल्लास के साथ महिलाओं ने की वट सावित्री की पूजा

पति की दीर्घायु जीवन एवं सुख समृद्धि की कामना

बजरंग पंडित पाकुड़।

पाकुड़। बुद्धवार को आपने पति की लंबी जीवन की कामना से हिन्दू महिलाएं वट सावित्री की पूजा पूरे जिले भर में हर्षोल्लास के साथ की। कथा के अनुसार सुहागसुहागिन महिलाएं अपने सुहाग की लंबी आयु ,सुख समृद्धि एवं कुमारी कन्या मनचाहा वर पाने के उद्देश्य से हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को वट सावित्री की पूजा पूरे विधि विधान के साथ करती हैं। प्रचलित कथा के अनुसार सावित्री सत्यवान यमराज की मूर्ति वट वृक्ष के नीचे स्थापित की जाती है एवं उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। महिलाएं वट सावित्री के उपलक्ष में सोलह सिंगार कर एक डाली में पंखा पुष्प धूप दीप प्रसाद, जल कच्चा सूत आदि लेकर लेकर वट वृक्ष के नीचे जाती हैं। वहां पूरे रीति नीति रीति रिवाज एवं विधि विधान से पूजा की जाती है। वट वृक्ष के जड़ में जल अर्पण करती हैं। अपनी बंधन कमजोर ना हो इसलिए सुहागिन महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर कच्चे धागे को मजबूती के साथ सात फेरे लगाकर सूत बनती हैं। कुछ महिलाएं पीपल वृक्ष के नीचे भी पूजा कर उन पर कच्चे धागा से परिक्रमा करती हैं एवं अपनी पति की लंबी उम्र की कामना करते हैं। फिर एक दूसरे को महिलाएं सिंदूर लगाती हैं। फल धूप मिठाई आदि से पूजन करती हैं। भीगा चना लेकर सावित्री सत्यवान एवं की कथा सुनती हैं। पूजा अर्चना के बाद अपने पति की प्यार से चरण स्पर्श करती हैं एवं उपवास रखकर पर्व को पूरा करती हैं। दूसरे दिन पारन के साथ अपनी पर्व की समाप्ति करती हैं।
जिला मुख्यालय स्थित काली भषाण मंदिर, थाना पाड़ा एवं हाट पाड़ा मंदिर, भगत पाड़ा, बागान पाड़ा, श्री शिव शीतला मंदिर, तलवाड़ंगा, राजापारा कोयला मोड़, अंबेडकर नगर हनुमान मंदिर के पास वट वृक्ष के नीचे महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा की।

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