थानापाड़ा की सरस्वती पुस्तकालय सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की तैयारी तेज, बंग्ला विधि से होगी आराधना; डांडिया, जागरण व सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे।
पाकुड़। शारदीय नवरात्र की आहट के साथ ही पाकुड़ शहर में दुर्गोत्सव की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। खेतों और किनारों पर लहराते कांस के फूल मां दुर्गा के आगमन का संदेश दे रहे हैं। शहर के प्रमुख पूजा स्थलों पर पंडाल निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। इनमें थानापाड़ा स्थित सरस्वती पुस्तकालय सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की पूजा इस बार भी खास आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। ब्रिटिश काल से चली आ रही यह पूजा अपने 137वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। समिति इस बार करीब 13 लाख रुपए के बजट से पूजा का आयोजन करेगी। कभी जिस स्थान पर दीवार पर चित्रकारी कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता था, वहीं आज भव्य पंडाल में मां की प्राण-प्रतिष्ठित प्रतिमा स्थापित की जाती है। 137 वर्षों की इस परंपरा ने पूजा को शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ दिया है।
100 मीटर के भव्य रास्ते से पहुंचेंगे श्रद्धालु
थानापाड़ा स्थित पूजा पंडाल में आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसको देखते हुए इस बार भी पंडाल का आकार काफी भव्य रखा जा रहा है। कांग्रेस जिला कार्यालय से स्टेडियम गेट तक करीब 100 मीटर का भव्य रास्ता तय करने के बाद श्रद्धालु मां के दर्शन कर सकेंगे। पंडाल और आसपास के क्षेत्र को आकर्षक रूप देने की तैयारी चल रही है।
बंग्ला विधि से होगी पूजा, एकादशी को विसर्जन
इस पूजा की सबसे खास पहचान इसकी बंग्ला विधि-विधान से होने वाली आराधना है। विशेष मंत्रोच्चार और पारंपरिक पूजा पद्धति श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहती है। नवरात्र के दौरान प्रतिदिन मां को अलग-अलग प्रकार के भोग लगाए जाएंगे, जिसे बाद में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। समिति की परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन दशमी के बजाय एकादशी के दिन किया जाता है। इस परंपरा का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा।
डांडिया-जागरण के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम
पूजा के दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ मनोरंजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। डांडिया, जागरण और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारी है। इससे पूजा स्थल पर पूरे नवरात्र उत्सव का माहौल देखने को मिलेगा।
परिचय पत्र के साथ तैनात रहेंगे समिति सदस्य
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर भी समिति ने तैयारी शुरू कर दी है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए समिति के सदस्य परिचय पत्र के साथ सेवा में तैनात रहेंगे। भीड़ नियंत्रण से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधा तक विभिन्न व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। 10 अक्टूबर को महालया के साथ दुर्गोत्सव की औपचारिक शुरुआत होगी। 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्र के पाठ शुरू होंगे, जबकि प्रतिमाओं का विसर्जन 20 और 21 अक्टूबर को किया जाएगा।








