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June 18, 2026 3:08 am

विद्यालय के शिक्षक की अनूठी कहानी, आदेश को ठेंगा दिखाकर कर रहे मनमानी

सुदीप कुमार त्रिवेदी

अमूमन ऐसा होता है कि जब वर्षो से बच्चों को शिक्षा देने वाले शिक्षक,अपने विद्यालय से स्थानांतरित होते हैं तो पूरे विद्यालय के साथ बच्चे भी गमगीन हो जाते हैं एवं बच्चों की यही इच्छा रहती है कि काश उक्त शिक्षक उनके ही विद्यालय में रह जाएँ, ऐसे वाक़ये में शिक्षक और बच्चों के बीच सर्वस्व समर्पण और अपनी जिम्मेदारी का भाव देखा जाता है, पर कुछ ऐसे भी शिक्षक हैं जो कि अपने पूराने विद्यालय में ही ताउम्र जमे रहने की जिद ठान कर बैठे हैं भले ही उनका स्थानांतरण विभागीय आदेश के द्वारा कर दिया गया हो । जी हाँ ऐसा ही एक नायाब मामला प्रकाश में आया है । मामला पाकुड़ के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का है । मामले का लब्बोलुआब यह है कि विभागीय आदेश के द्वारा शिक्षकों का स्थानांतरण तो कर दिया गया है एवं स्थानांतरित विद्यालय में योगदान करने का आदेश भी जारी किया गया है परंतु दिल है कि मानता नहीं की तर्ज पर शिक्षक अपने पूराने विद्यालय में ही जमे रहने का मन बना चुके हैं । विदित हो कि समग्र शिक्षा पाकुड़ के झारखंड एजुकेशन प्रोजेक्ट के कार्यालय आदेश पत्रांक 997, दिनांक 17/11/23 के द्वारा कुसुम कुमारी, वार्डन सह शिक्षिका, जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्रांक 1125 दिनांक 28/12/2023 के द्वारा राखी चौधरी, जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्रांक 1126 दिनांक 28/12/2023 के द्वारा श्वेता सुमन, जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्रांक 1127 दिनांक 28/12/2023 के द्वारा अनूप कुमार वर्मा एवं जिला शिक्षा पदाधिकारी के पत्रांक 1128 दिनांक 28/12/2023 के द्वारा सुश्री अंजली टुडू यानि कुल पाँच शिक्षकों को दूसरे विद्यालय में स्थानांतरित किया गया । इतना ही नही इन स्थानांतरित शिक्षकों को अपने नए विद्यालय में दिनांक 03/01/2024 तक योगदान करने हेतु पाकुड़ उपायुक्त का आदेश भी प्राप्त हुआ । कुल पाँच लोगों में तीन ने आदेश का अनुपालन करते हुए अपने नए विद्यालय में योगदान तो कर लिया, परंतु श्वेता सुमन अभी भी कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय पाकुड़ में जमी बैठी हैं । मजेदार बात यह कि वो उक्त विद्यालय में बिना वेतन के ही सेवा देने हेतु हर रोज पहुँचती हैं । इस बाबत जब श्वेता सुमन का पक्ष जानने के लिए उनके पुराने विद्यालय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पाकुड़ पहुँचकर उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने सीधे तौर पर उक्त स्थानांतरण के आदेश को नियम के विरूद्ध बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर वो पाकुड़ उपायुक्त के समक्ष अर्जी भी लगाई है, लेकिन इस दौरान शिक्षिका ने अपनी ओर से कोई भी लिखित साक्ष्य नही दिखाया बल्कि पूछे जाने पर कहा कि इस बाबत अपेक्षित साक्ष्य विभाग से मिल जाएगा । दूसरी ओर इस मुद्दे पर जब जिला शिक्षा पदाधिकारी नयन कुमार से दूरभाष पर संपर्क स्थापित किया गया तो उन्होंने कहा कि ये मामला उनके संज्ञान में है और आगे की कार्यवाही की जा रही है । अब सवाल उठता है कि विभागीय व उपायुक्त के आदेश को अनदेखी करने का साहस एक शिक्षक कैसे कर सकता है ? और दूसरी बात की बिना वार्डन की सहमति के ये अनवरत जारी कैसे रह सकता है ?

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