हिंदू सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र एवं स्वस्थ जीवन के लिए भगवान शंकर एवं माता पार्वती की कि आराधना
राज कुमार भगत
पाकुड़।भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज महाव्रत मनाया जाता है। इस वर्ष तीज में रवि योग शुक्ल योग एवं हस्त नक्षत्र का महासंयोग है। उदया तिथि 6 सितंबर को हरतालिका तीज व्रत जिले भर की हिंदू सुहागिन महिलाओं द्वारा अपनी पति की दुर्गायु जीवन, अच्छे स्वास्थ्य, उन्नति विभिन्न कामनाओं पूजा अर्चना किया गया। पूरे दिन निर्जला उपवास रहकर स्नान ध्यान के पश्चात भगवान शिव एवं पार्वती की जनेऊ पान सुपारी बेलपत्र कलश अक्षत दूब पुष्प नवैध गंगाजल पुष्प धूप दीप आदि से पूजा की। देवी मां पार्वती को सिंदूर बिंदी चूड़ी कंगी मेहंदी कुमकुम वस्त्र आदि समर्पित करती है। मां पार्वती एवं शंकर जी की कथा सुनती हैं। कई स्थानों पर तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती गणेश जी की बालू रेत व काली मिट्टी से प्रतिमा बनाई गई , फिर चौकी पर केले के पत्ते पर भगवान गणेश माता पार्वती एवं भगवान शंकर को आसान पर बिठाकर उनकी पूजा अर्चना की । कुंवारी लड़कियां भी योग्य पति के मनोकामना से यह व्रत रखती हैं। इसे तप साध्य का व्रत भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि माता पार्वती ने सर्वप्रथम भगवान शिव को पति के रूप में पानी के लिए हरतालिका तीज व्रत का पालन किया था और तभी से यह परंपरा कायम है। जिले भर की हिंदू महिलाएं पूरे सोलह सिंगार कर तीज धर्म का पालन करते हुए भगवान शिव के मंदिर में माता पार्वती भगवान गणेश एवं बाबा भोलेनाथ की पूजा की। एक दूसरे को सिंदूर लगाकर अपने-अपने पति के दीर्घायु जीवन की कामना की। 7 सितंबर को प्रातः 6:02 व्रत का समय समाप्त होने के पश्चात सुहागिन महिलाएं अपनी व्रत को खोलेंगी।






