पाकुड़िया। कुपोषण मुक्त भारत की परिकल्पना को साकार करने के उद्देश्य से सोमवार को प्रखंड मुख्यालय परिसर में प्रखंड स्तरीय पोषण पखवाड़ा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और आंगनबाड़ी सेविकाओं की बड़ी भागीदारी रही। पोषण पखवाड़ा के तहत प्रखंड की सभी 18 पंचायतों की ओर से पोषण स्टॉल लगाए गए। प्रत्येक स्टॉल पर स्थानीय मोटे अनाज और मौसमी फल-सब्जियों से तैयार व्यंजन प्रदर्शित किए गए, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। कार्यक्रम में झामुमो केंद्रीय कमेटी सदस्य उपासना मरांडी, प्रखंड प्रमुख कालिदास मरांडी, सीडीपीओ सह बीडीओ सोमनाथ बनर्जी, उप प्रमुख अर्चना देवी एवं झामुमो प्रखंड अध्यक्ष मोतीलाल हांसदा सहित अन्य अतिथियों ने सभी स्टॉलों का निरीक्षण किया और व्यंजनों का स्वाद भी चखा। इस मौके पर उपासना मरांडी ने कहा कि पोषण का अर्थ महंगा भोजन नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य पदार्थों से संतुलित आहार सुनिश्चित करना है। वहीं, बीडीओ सह सीडीपीओ सोमनाथ बनर्जी ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, और उनका सम्मान पूरे तंत्र का मनोबल बढ़ाता है। कार्यक्रम के दौरान प्रखंड की 18 पंचायतों से चयनित 28 नोडल सेविकाओं को उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। ये सेविकाएं वजन-लंबाई मापन, होम विजिट, टीएचआर वितरण तथा कुपोषित (सैम-मैम) बच्चों की निगरानी में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। इसके अलावा, चार गर्भवती महिलाओं की गोदभराई रस्म भी संपन्न कराई गई। उन्हें पोषण टोकरी में गुड़, चना, मूंगफली, आयरन की गोलियां और हरी सब्जियां प्रदान की गईं। वहीं, छह माह पूर्ण कर चुके दो बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार जनप्रतिनिधियों के हाथों संपन्न कराया गया, जिसमें उन्हें पहली बार खीर खिलाकर ऊपरी आहार की शुरुआत कराई गई। प्रखंड प्रमुख कालिदास मरांडी ने कहा कि बच्चे के जीवन के पहले 1000 दिन उसकी सेहत की नींव होते हैं, और इस अवधि में सही पोषण मिलने से उसका समग्र विकास सुनिश्चित होता है। कार्यक्रम का संचालन बीडीओ सह सीडीपीओ सोमनाथ बनर्जी ने किया। अंत में “सही पोषण, देश रोशन” के नारे के साथ पोषण पखवाड़ा का समापन हुआ। मौके पर महिला पर्यवेक्षिका मंदोदरी देवी समेत अन्य पर्यवेक्षिकाएं और सैकड़ों आंगनबाड़ी सेविकाएं उपस्थित थीं।







