यासिर अराफ़ात
पाकुड़ : झारखंड प्रदेश में विधानसभा चुनाव का शंखनाद बजने लगा है. औपचारिक तौर पर विधानसभा चुनाव की तिथि की घोषणा अभी तक नहीं हुई है. परंतु जिला प्रशासन चुनाव की तैयारी को लेकर सभी प्रक्रिया शुरू कर दी है.इस बीच शुक्रवार को स्थानीय एक अखबार में पूर्व विधायक अकील अख्तर को लेकर एक खबर प्रकाशित हुई कि अकील अख्तर कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं. जिसके लिए वे दिल्ली दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं. यह खबर पूरे क्षेत्र के लिए चर्चा का विषय बन गई. जहां इस खबर से अकील अख्तर के चाहने वालों के अंदर एक खास उत्साह देखा गया. वहीं कांग्रेस के चाहने वालों के अंदर नाराजगी देखी गई. हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि अभी तक अकील अख्तर ने नहीं की है. हाल ही में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के निर्देशानुसार पाकुड़ विधानसभा से पांच उम्मीदवारों की अनुशंसा मांगी गई थी. पाकुड़ जिला के पर्यवेक्षक श्यामल किशोर सिंह ने पाकुड़ कांग्रेस कार्यालय में जिला अध्यक्ष प्रखंड अध्यक्ष तथा तमाम कांग्रेस के पदाधिकारी के साथ उम्मीदवार के नाम की चर्चा की गई थी. सभी कांग्रेस पदाधिकारी ने वर्तमान विधायक आलमगीर आलम के नाम की ही सहमति जताई थी. विकल्प के तौर पर दूसरा नाम तनवीर आलम का दिया गया था. पूर्व विधायक अकील अख्तर के बारे में स्थानीय अखबार में जो खबर प्रकाशित हुई और जैसी ही सोशल मीडिया के न्यूज़ ग्रुप में यह खबर सर्कुलेट हुई राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई. वहीं कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रक्रिया के नियम अनुसार पर्यवेक्षक द्वारा जिन नामों की लिस्ट भेजी गई है उम्मीदवार के तौर पर उन्ही नाम में से किसी एक नाम पर मोहर लगना निश्चित है. अब चुंकि पूर्व विधायक अकील अख्तर अभी तक कांग्रेस पार्टी में नहीं है. ऐसी स्थिति में पाकुड़ विधानसभा से टिकट को लेकर उनके नाम पर मोहर लगना असंभव है. क्योंकि पर्यवेक्षक का काम बस इतना है कि कांग्रेस पार्टी के ही जिला अध्यक्ष प्रखंड अध्यक्ष और तमाम पदाधिकारी की सहमति से ही टिकट के दावेदारों का नाम भेजना होता है . राजनीतिक विशेषज्ञ यह मानते हैं कि पाकुड़ विधानसभा के जितने भी कांग्रेस के पदाधिकारी हैं वे आलमगीर आलम और तनवीर आलम को छोड़कर किसी तीसरे व्यक्ति के नाम पर सहमति जता ही नहीं सकते. हालांकि सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता की पूर्व विधायक अकील अख्तर आजसू पार्टी छोड़ने के पश्चात कांग्रेस पार्टी या फिर झारखंड मुक्ति मोर्चा से संबंध दोबारा बनाने के प्रयास में है. सूत्र यह भी बताते हैं कि पूर्व विधायक अकील अख्तर लगातार रांची और दिल्ली दरबार में झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस पार्टी की टिकट लेने के लिए जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं.
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पाकुड़ पहुंचकर कर दिए थे इशारा
प्रदेश अध्यक्ष ने विगत दिनों पाकुड़ पहुंचकर कहा था की 40 सालों से आलमगीर आलम ने कांग्रेस पार्टी के संगठन को मजबूत बनाया है, उन्होंने यह भी कहा था कि पहले भी आलमगीर आलम यहां के नेता थे,नेता है और नेता रहेंगे. साथ ही उन्होंने तनवीर आलम की तारीफ भी की थी और कहा था कि आने वाले दिनों में तनवीर आलम पाकुड़ विधानसभा का भविष्य है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस बयान से यह साफ-साफ इशारा मिल रहा है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी आलमगीर आलम पर ही भरोसा कर सकती है, दूसरे विकल्प के तौर पर तनवीर आलम के बारे में भी सोचा जा सकता है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान कहीं ना कहीं यह दर्शाता है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में आलमगीर आलम या तनवीर आलम को छोड़कर किसी तीसरे व्यक्ति को टिकट देना असंभव जैसा है.







