जिला परिषद उपाध्यक्ष ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन, खनन इकाइयों को प्राथमिकता देने का आरोप
पाकुड़। पाकुड़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रातभर निर्बाध बिजली आपूर्ति की माँग को लेकर आवाज़ तेज हो गई है। जिला परिषद, पाकुड़ के उपाध्यक्ष अशोक कुमार भगत ने सोमवार को उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक ग्रामीण इलाकों में लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कराने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में क्रशर और खनन इकाइयों को प्राथमिकता देकर ग्रामीण आबादी को प्रतिदिन 10-12 घंटे की बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजीवन गहरे संकट में है।
शिक्षा पर गहरा असर।
उपाध्यक्ष के अनुसार, जिले के प्रभावित गाँवों में लगभग 78% छात्र-छात्राएँ दिनभर कृषि कार्य और मजदूरी करने के बाद रात में पढ़ाई पर निर्भर हैं। लेकिन अनियमित बिजली आपूर्ति के चलते अध्ययन समय में 40% तक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति बाधित हो रही है।
स्वास्थ्य संकट भी गहराया।
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक बिजली कटौती के चलते ग्रामीणों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। इससे थकान बढ़ने के साथ-साथ थकावटजनित दुर्घटनाओं में 30% की वृद्धि हुई है। अशोक कुमार भगत ने कहा कि यह स्थिति ग्रामीणों के स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उद्योगों को प्राथमिकता का आरोप
उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि “खनन और क्रशर इकाइयों को 92% तक निर्बाध बिजली आपूर्ति दी जा रही है, जबकि ग्रामीण जनता को अंधेरे में जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है।” उन्होंने इसे औद्योगिक पक्षपात करार देते हुए प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है।
मुख्य माँगें।
ज्ञापन में यह स्पष्ट रूप से माँग की गई है कि ग्रामीण आवासीय क्षेत्रों में प्रतिदिन शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक बिना किसी बाधा के बिजली आपूर्ति अनिवार्य की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई, ग्रामीणों का स्वास्थ्य और सामान्य जनजीवन सुरक्षित रह सके।





