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May 1, 2026 11:08 am

सरकारी नहर पर कब्ज़ा, झारखंड के बाहर के लोगों ने नहर की जमीन पर डाला डेरा, प्रशासन बनी मूकदर्शक।

सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने कहा कि किसानों की जीवनरेखा पर हो रहा डाका, तुरंत कार्रवाई करे प्रशासन।

कहीं राजनीतिक दवाब तो नहीं जिसके आगे प्रशासन मजबूर है, अगर ऐसा तो हर दिन कहीं न कहीं सरकारी जमीन पर होता रहेगा कब्जा।

पाकुड़ | झारखंड–पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे पाकुड़ की नहर की जमीन चांचकी से चांदपुर तक जिले में एक बार फिर सरकारी जमीन पर कब्ज़े का खेल शुरू हो गया है। इस बार निशाने पर है एक महत्वपूर्ण सरकारी सिंचाई नहर, जिस पर बंगाल के कुछ लोगों द्वारा अवैध निर्माण और कब्ज़े का आरोप लगा है। इस गंभीर मामले की शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के समक्ष लिखित रूप में दर्ज कराई है।

सुरेश अग्रवाल ने अपनी शिकायत में कहा।

सरकारी नहरें किसानों के लिए जीवनरेखा हैं, लेकिन कुछ लोग सीमा का फायदा उठाकर इन पर कब्ज़ा कर रहे हैं। यह न सिर्फ सरकारी संपत्ति पर डाका है, बल्कि किसानों की सिंचाई व्यवस्था पर भी सीधा हमला है। मैंने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत कब्जा हटाकर नहर को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश तो जारी कर दिए हैं, रिपोर्ट भी तैयार हो चुकी है, लेकिन नहर अब तक अतिक्रमण मुक्त नहीं कराई गई है। सूत्रों के मुताबिक, एक टीम ने मौके का मुआयना कर वस्तुस्थिति की रिपोर्ट प्रशासन को सौंप दी है, अब इंतजार है सिर्फ ठोस कार्रवाई का।
स्थानीय लोगों में प्रशासन की ढिलाई को लेकर गहरी नाराज़गी है। ग्रामीणों का कहना है कि “सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने वालों को खुली छूट मिल गई है, जबकि किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। यह घटना न सिर्फ पाकुड़ जिले में सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि सीमावर्ती इलाकों में प्रशासनिक सख्ती की कितनी ज़रूरत है।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और क्या वाकई इस सरकारी नहर को कब्ज़ामुक्त करा पाएगा —
या फिर यह मामला भी फाइलों में धूल खाता रहेगा?

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