पाकुड़: कभी सीमित संसाधनों में पारंपरिक खेती करने वाली आदिवासी महिला कोरोनिला किस्कू आज अपने गांव में सफलता की नई कहानी लिख रही हैं।मेहनत, लगन और कुछ नया करने की चाह ने उन्हें वहां पहुंचा दिया, जहां वे न सिर्फ खुद आर्थिक रूप से मजबूत हुईं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं।हिरणपुर प्रखंड के एक छोटे से गांव की रहने वाली कोरोनिला ने इस बार कुछ अलग करने की ठानी। उन्होंने पहली बार टपक सिंचाई पद्धति अपनाते हुए तरबूज की खेती शुरू की। शुरुआत में चुनौतियां थीं, संसाधनों की कमी थी, लेकिन उनके हौसले ने हार नहीं मानी। नतीजा यह हुआ कि पहली ही फसल में उन्हें जबरदस्त सफलता मिली।सोमवार को उन्होंने एक ही दिन में करीब 400 किलो तरबूज की बिक्री की, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा हुआ। यही नहीं, उनकी इस मेहनत ने उन्हें पहली ही कोशिश में लखपति बना दिया। अब उनके खेत में लहलहाते तरबूज आसपास के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
सखी मंडल से जुड़कर मिली नई दिशा
कोरोनिला ने बताया कि भले ही उनकी औपचारिक शिक्षा पूरी नहीं हो पाई, लेकिन खेती के प्रति उनका जुनून हमेशा बना रहा। उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग के पलाश (JSLPS) से जुड़कर सखी मंडल का सहारा लिया। यहीं से उन्हें आधुनिक खेती के तौर-तरीकों की जानकारी मिली, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
सिर्फ तरबूज ही नहीं, स्ट्रॉबेरी से भी कमाई
कोरोनिला की सफलता सिर्फ तरबूज तक सीमित नहीं रही। उन्होंने 50 डिसमिल जमीन पर स्ट्रॉबेरी की खेती कर 1 लाख रुपये से अधिक की आमदनी हासिल की। हर सप्ताह लगभग 4 हजार रुपये की स्ट्रॉबेरी बेचकर उन्होंने नियमित आय का स्रोत भी तैयार किया।इसके अलावा उन्होंने ग्राफ्टेड टमाटर, प्याज और धान की खेती से भी बेहतर उत्पादन हासिल किया।जहां एक ओर 2 क्विंटल प्याज का उत्पादन हुआ, वहीं 40 क्विंटल धान की उपज ने उनकी आय में और इजाफा किया।
अधिकारियों ने भी सराहा प्रयास
कोरोनिला की सफलता की चर्चा अब प्रशासनिक स्तर तक पहुंच चुकी है। हिरणपुर के बीडीओ दिलीप टुडू और मनरेगा के बीपीओ ट्विंकल चौधरी ने उनके खेत का निरीक्षण किया और उनके कार्यों की सराहना की।
बीडीओ टुडू दिलीप ने कहा कि प्रखंड की महिलाएं सखी मंडल से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, जो बेहद सराहनीय है।
अब बनीं दूसरों के लिए प्रेरणा
आज कोरोनिला किस्कू की कहानी सिर्फ उनकी सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन सभी महिलाओं के लिए एक संदेश है, जो कुछ करना चाहती हैं लेकिन संसाधनों की कमी से रुक जाती हैं। उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।हिरणपुर की यह बेटी अब पूरे इलाके में प्रगतिशील किसान के रूप में पहचानी जा रही है—और उनकी यह कहानी आने वाले समय में कई और सपनों को पंख देने वाली है।






