14.58 लाख का शौचालय बना सफेद हाथी,सालों से लटका है ताला।
सतनाम सिंह
पाकुड़ जिला परिषद द्वारा लाखों की लागत से तैयार किया गया सामुदायिक शौचालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि यह शौचालय किसी सुनसान जगह पर नहीं, बल्कि सोनाजोड़ी सदर अस्पताल के मुख्य द्वार के ठीक पास स्थित है, जहाँ रोजाना सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों का आना-जाना लगा रहता है।
शिलालेख खोल रहा है पोल
शौचालय की दीवार पर लगा शिलालेख विभाग की लापरवाही की गवाही दे रहा है। शिलालेख के अनुसार कुल लागत 14,58,420 (चौदह लाख अट्ठावन हजार चार सौ बीस रुपये)निर्माण सत्र: 2019-20,निधि: जिला परिषद, पाकुड़ है।
5 साल बाद भी ‘उद्घाटन’ का इंतजार
हैरानी की बात यह है कि 2019-20 में निर्मित इस शौचालय को बने लगभग 5 साल बीत चुके हैं।नियमतः निर्माण के तुरंत बाद इसे जनता को समर्पित कर देना चाहिए था, लेकिन विडंबना देखिए कि अस्पताल आने वाले गरीब मरीज और महिलाएं बाहर खुले में जाने को मजबूर हैं, जबकि बगल में 14.58 लाख की लागत वाला आलीशान शौचालय बंद पड़ा है।सदर अस्पताल के गेट के पास शौचालय की सुविधा न मिलने के कारण आसपास के क्षेत्रों में गंदगी फैल रही है। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग स्वच्छता का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के मुहाने पर ही बना यह सार्वजनिक शौचालय प्रशासनिक उदासीनता के कारण ‘शो-पीस’ बनकर रह गया है।स्थानीय ग्रामीणों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि प्रशासन ने पैसे तो खर्च कर दिए, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। बंद रहने के कारण भवन भी अब धीरे-धीरे जर्जर होने लगा है। लोगों ने सवाल उठाया है कि क्या इस भारी-भरकम राशि का बंदरबांट कर सिर्फ खानापूर्ति की गई है?बड़ा सवाल है कि आखिर किसके आदेश का इंतजार है? क्या जिला प्रशासन और विभाग इस बंद ताले को खोलकर जनता को राहत देगा या फिर 14.58 लाख की यह सरकारी राशि इसी तरह धूल फांकती रहेगी?








