अनोखा है चिड़ियों का संसार
सुबह-सवेरे सूरज के किरणों के निकलने से पहले ची ची चिं करके तुम इस जग को गीत सुनाकर जगाती हो।
दिनभर खुले आसमान में उड़ती हो भूखी- प्यासी,
फिर भी सदा भलाई करती और मीठा-मीठा तुम हो गाती
स्वंय भूखी रहकर कमी पेड़ों से तो कमी चट्टानों से तो कभी तुफान और बारिस से तुम हो टकराती फिर भी बिना उफ़ किये तुम सदा इस जग की करती हो भलाई।

और बदले में हम मनुष्य तुम्हें कुछ न देते हैं तुम्हारी उदारता, सुंदरता और कोमलता के बदले तुम्हें हम पिंजरे में बंद कर देते है।
कमी तुम्हारे घोसले तोडे, कमी तुम्हारे अंडे फोडे, हम मनुष्य तुम्हें कही चैन से न रहने देते है।
निवेदन है मनुष्यता से यह संसार इनके लिए भी छोड़ो,
जीने दो तुम इन्हें भी चैन से निर्भय होकर तुम न इनके घर को तोड़ों।।
कवित्री- आशा कुमारी
शिक्षिका- सेंट मैथ्यू स्कूल
टी.टी.पी.एस, ललपनिया
जिला- बोकारो





