पाकुड़। किसानों की समस्याओं और झारखंड सरकार की नीतियों के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार और मंगलवार को पाकुड़ जिले के महेशपुर और लिट्टीपाड़ा प्रखंडों सहित विभिन्न स्थानों पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। इन प्रदर्शनों के बाद राज्यपाल के नाम ज्ञापन भी प्रखंड विकास पदाधिकारियों के माध्यम से सौंपा गया। महेशपुर प्रखंड कार्यालय के समक्ष आयोजित धरना में भाजपा नेताओं ने राज्य सरकार पर किसानों के साथ चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। ज्ञापन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3200 रुपये प्रति क्विंटल करने, फसल नुकसान का उचित मुआवजा देने, बकाया भुगतान सुनिश्चित करने, समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने, दो लाख रुपये तक ऋण माफी, मुफ्त बिजली, 450 रुपये में गैस सिलेंडर तथा सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ करने सहित कुल 12 प्रमुख मांगें रखी गईं। भाजपा नेताओं ने कहा कि हाल ही में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलें भारी नुकसान का शिकार हुई हैं, लेकिन अब तक न तो सही सर्वे हुआ है और न ही मुआवजा दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस कार्यक्रम में जिला और मंडल स्तर के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसी क्रम में लिट्टीपाड़ा प्रखंड मुख्यालय चौक पर आयोजित दूसरे धरना-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसानों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यहां वक्ताओं ने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और सरकारी खरीद व्यवस्था में बिचौलियों का दबदबा बढ़ गया है। सभा में नेताओं ने धान की पारदर्शी सरकारी खरीद, समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज-खाद, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड, बालू खनन और अन्य स्थानीय मुद्दों पर भी सरकार को घेरा गया।
पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सहित कई नेताओं ने सरकार पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप लगाए। कार्यक्रम के अंत में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बीडीओ को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि जल्द कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके अलावा मंगलवार को एक अन्य धरना-प्रदर्शन में किसानों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ ऋण माफी, “मइया सम्मान योजना”, पंचायत प्रतिनिधियों और सहिया-जलसहिया के मानदेय वृद्धि सहित कुल 25 मांगें उठाई गईं। नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव में किए गए वादों को पूरा नहीं किया है, जिसमें 3200 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद का वादा भी शामिल है, जबकि वर्तमान में 2400 रुपये की दर से खरीद हो रही है। धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने किसानों की आर्थिक स्थिति, फसल नुकसान और समय पर भुगतान नहीं मिलने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से तत्काल राहत की मांग की। कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में जिला, प्रखंड और मंडल स्तर के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल रहे।









