पाकुड़। डीबीएल पचुवाड़ा कोल माइंस प्राइवेट लिमिटेड के लोटामारा लोडिंग-अनलोडिंग रेलवे साइडिंग पर स्थानीय कर्मचारियों के साथ कथित भेदभाव और प्रबंधन की मनमानी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने स्थानीय सुपरवाइजरों को बिना किसी ठोस कारण के सेवा से हटा दिया और उनका अप्रैल माह का मानदेय भी रोक दिया, जिससे कर्मचारियों में गहरा आक्रोश फैल गया है। आक्रोशित कर्मचारियों ने मंगलवार सुबह 10 बजे से रेलवे रैक लोडिंग समेत सभी विभागीय कार्यों को अनिश्चितकाल के लिए ठप करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन को लिखित आवेदन देकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पीड़ित कर्मचारियों कुमुद कुमार दास, समीर कुमार दास, जितेंद्र कुमार सिंह और जय नारायण पांडे ने उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पदाधिकारी को संयुक्त रूप से आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि लगातार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने 20 अप्रैल 2026 को भी संबंधित प्रबंधन को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन उस पर कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। आरोप है कि प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय अनदेखा कर दिया। पीड़ितों का कहना है कि वे 15 फरवरी 2023 से डीबीएल पचुवाड़ा कोल माइंस में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत थे, जबकि इससे पहले भी जून 2015 से पैनम कोल माइंस लिमिटेड के अधीन रेलवे साइडिंग में सेवाएं दे चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें अचानक बिना कारण नौकरी से हटा दिया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि बाहरी राज्यों के कर्मचारियों को अप्रैल माह का वेतन भुगतान कर दिया गया, जबकि स्थानीय सुपरवाइजरों का वेतन रोक दिया गया। कर्मचारियों ने इसे पूरी तरह भेदभावपूर्ण और द्वेषपूर्ण कार्रवाई बताया है। स्थानीय कर्मियों ने कहा कि यह कदम न केवल उनके परिवारों को आर्थिक संकट में डाल रहा है, बल्कि राज्य सरकार के उस नियम की भी अनदेखी है जिसमें स्थानीय युवाओं को रोजगार में 75 प्रतिशत तक प्राथमिकता देने की बात कही गई है। कर्मचारियों ने मांग की है कि उनका सेवा से निष्कासन तत्काल वापस लिया जाए, रोका गया वेतन जारी किया जाए और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।








