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May 19, 2026 11:03 pm

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मुख्यमंत्री सारथी योजना में नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से ठगी; पैसे और सर्टिफिकेट मांगे तो मिली धमकी

राजद जिलाध्यक्ष ने दी चेतावनी, कहा ‘दो माह में लें परीक्षा वरना होगी कानूनी कार्रवाई, विभागीय मंत्री तक जाएगा मामला

पाकुड़: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सारथी योजना’ को पाकुड़ में पलीता लगाया जा रहा है। योजना के तहत पाकुड़ शहर में संचालित जेआरएस टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड पर साहिबगंज और पाकुड़ के दर्जनों गरीब विद्यार्थियों से नौकरी के नाम पर लाखों रुपये की ठगी और प्रमाण पत्र मांगने पर मारने पिटने की धमकी देने का सनसनीखेज आरोप लगा है। इस मामले में अब राजनीति भी गरमा गई है और राजद जिलाध्यक्ष ने संस्थान को अल्टीमेटम दे दिया है। दर्जनों छात्रों ने डीसी को ज्ञापन सौंप न्याय की गुहार मांगी है।

सऊदी अरब में नौकरी का झांसा, किसी से 1 लाख तो किसी से लिए हजार

पीड़ित छात्र निवेक रवानी, जीवन घोष और जीत सिंह सहित अन्य विद्यार्थियों ने डीसी को आवेदन देकर बताया कि प्रशिक्षण के बाद उन्हें बड़े सपने दिखाए गए।विशाल प्रजापति नामक व्यक्ति ने खुद को सऊदी अरब के बड़े ठेकेदार का बेटा बताकर वीजा और टिकट के नाम पर पैसे ऐंठे।निवेक रवानी से कुल ₹1,05,900 की ठगी की गई।
वहीं अन्य छात्रों से प्लेसमेंट के नाम पर 1,000 से 11,000 रूपया तक की वसूली की गई।वहीं छात्र दीपक कुमार का आरोप है कि प्रोजेक्ट मैनेजर मोहम्मद आसिफ इकबाल ने सर्टिफिकेट मांगने पर गालियां दीं।

राजद जिलाध्यक्ष ने सेंटर पहुंचकर लिया जायजा

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजद के पाकुड़ जिला अध्यक्ष महावीर मड़ैया ने सेंटर का दौरा किया। सेंटर सुपरिटेंडेंट से वार्ता के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में संस्थान को कड़ी चेतावनी दी।कहा हमने संस्थान को स्पष्ट कर दिया है कि दो महीने के भीतर सभी लंबित परीक्षाएं आयोजित कर छात्रों को मुक्त करें। तकनीकी दिक्कतों का बहाना अब नहीं चलेगा। जहां तक पैसे के लेन-देन और जान से मारने की धमकी का सवाल है, यह जांच का विषय है। यदि आरोप सही पाए गए, तो हम जिला प्रशासन के साथ-साथ विभागीय मंत्री को भी पत्र लिखेंगे। दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पूरा मामला: 17 नवंबर से शुरू हुई थी ठगी की स्क्रिप्ट

विद्यार्थियों ने बताया कि 17 नवंबर 2025 से शुरू हुआ 3 माह का प्रशिक्षण 22 फरवरी 2026 को समाप्त हुआ था। इसके बाद से ही छात्र अपने हक के लिए भटक रहे हैं। 18 मई को जब छात्र सेंटर पहुंचे, तो प्रोजेक्ट मैनेजर और मकान मालिक ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। फिलहाल, छात्रों ने उपायुक्त से न्याय, राशि की वापसी और प्रमाण पत्र दिलाने की गुहार लगाई है। हालांकि दूसरे पक्ष ने अपने बयान में कहा कि सारे आरोप निराधार है।

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