महेशपुर (पाकुड़): चंडालमारा-पाखरिया (पैनम पथ) सड़क चौड़ीकरण परियोजना में भूमि अधिग्रहण को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरकारी अभिलेखों में जहां केवल 10 डिसमिल भूमि अधिग्रहित दर्शाई गई है, वहीं विभागीय जांच में करीब 70 डिसमिल जमीन पर सड़क निर्माण के लिए स्थायी कब्जा किए जाने की पुष्टि हुई है। हैरानी की बात यह है कि जांच के आठ साल बाद भी प्रभावित रैयत को शेष भूमि का मुआवज़ा नहीं मिल सका है। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, पाकुड़ द्वारा 14 सितंबर 2018 को जारी पत्रांक-24/भू.अ. में शिकायत को गंभीर मानते हुए जांच कराई गई थी। शिकायत में कहा गया था कि अधियाचना में केवल 10 डिसमिल भूमि दिखाई गई, जबकि वास्तविक रूप से कहीं अधिक जमीन सड़क निर्माण में चली गई। अंचल अधिकारी, महेशपुर की जांच में मौजा चंडालमारा, थाना संख्या-91, जमाबंदी संख्या-24, दाग संख्या-139 की करीब 70 डिसमिल भूमि सड़क चौड़ीकरण में उपयोग होने की पुष्टि हुई। इसके बाद जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने पथ प्रमंडल, पाकुड़ के कार्यपालक अभियंता को स्थल सत्यापन कर शेष भूमि की नई अधियाचना भेजने का निर्देश दिया था, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका।
प्रभावित रैयत गणेश मंडल ने 9 दिसंबर और 23 दिसंबर 2025 के अलावा 19 जून 2026 को भी उपायुक्त, पाकुड़ को आवेदन देकर मुआवज़ा भुगतान की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सामाजिक कार्यकर्ता ब्यूटी मंडल ने भी मामले को सार्वजनिक करते हुए सवाल उठाया है कि जब विभागीय जांच में अतिरिक्त भूमि उपयोग की पुष्टि हो चुकी है, तब प्रभावित परिवार को वर्षों से उसका वैधानिक मुआवज़ा क्यों नहीं दिया जा रहा है। अब यह मामला केवल लंबित मुआवज़े का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की पारदर्शिता का भी बन गया है। सड़क पर वर्षों से आवागमन हो रहा है, लेकिन जिनकी जमीन गई, वे आज भी अपने अधिकार के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।








