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September 15, 2026 9:02 pm

कुटुंब न्यायालय की पहल से टूटते परिवार को मिला सहारा, पति-पत्नी ने फिर साथ रहने की जताई सहमति।

पाकुड़। पारिवारिक विवादों को सुलझाने और टूटते रिश्तों को बचाने की दिशा में पाकुड़ व्यवहार न्यायालय के कुटुंब न्यायालय ने एक सराहनीय पहल की है। प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय रजनीकांत पाठक के प्रयास से मूल भरण-पोषण वाद संख्या 149/2026 में पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चले आ रहे आपसी मतभेद को दूर कराया गया। दोनों ने न्यायालय की पहल पर अपने विवाद को खत्म कर साथ रहने की सहमति जताई।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पति-पत्नी के बीच आपसी संवाद और समझ कायम कराने पर जोर दिया। प्रधान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को एक-दूसरे की भावनाओं को समझने, आपसी मनमुटाव से बचने और पारिवारिक जीवन को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाने की सलाह दी। इस पूरे मामले में डालसा के मध्यस्थता केंद्र की भी अहम भूमिका रही। मीडिएटर अधिवक्ता ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर विवाद के समाधान का रास्ता तैयार किया। बातचीत के बाद दंपती ने आपसी सहमति से साथ रहने का निर्णय लिया। न्यायालय की इस पहल से न केवल एक पारिवारिक विवाद का समाधान हुआ, बल्कि टूटने की कगार पर पहुंच चुके दांपत्य रिश्ते को भी नई शुरुआत मिली। समझौते के बाद दंपती को खुशी-खुशी साथ रहने की शुभकामनाओं के साथ न्यायालय से विदा किया गया। मौके पर न्यायालय कर्मी, दोनों पक्षों के अधिवक्ता और परिजन मौजूद रहे।

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