रीडिंग रैली, क्विज, कविता वाचन और रचनात्मक गतिविधियों से विद्यार्थियों में विकसित की गई पढ़ने की संस्कृति।
पाकुड़। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के निर्देशानुसार दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) पाकुड़ में 19 जून से 18 जुलाई तक आयोजित ‘पी.एन. पनिक्कर राष्ट्रीय पठन एवं डिजिटल पठन माह’ का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। पूरे माह चले कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में नियमित अध्ययन की आदत विकसित करना, पुस्तकालय संस्कृति को बढ़ावा देना तथा आजीवन सीखने की भावना को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत में पुस्तकालय आंदोलन के जनक माने जाने वाले पी.एन. पनिक्कर को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान विद्यार्थियों को उनके जीवन, पुस्तकालय आंदोलन में दिए गए योगदान और साक्षरता अभियान से जुड़ी प्रेरक डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई। साथ ही अध्ययन और पुस्तकालय के महत्व पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।
पठन माह के दौरान विद्यालय परिसर में रीडिंग अवेयरनेस रैली निकाली गई। रैली में विद्यार्थियों ने “रीड एंड ग्रो”, “पढ़ेगा भारत, बढ़ेगा भारत” तथा “पुस्तकें हैं सच्ची मित्र” जैसे प्रेरक नारों के माध्यम से समाज में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने का संदेश दिया। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए पठन संकल्प, क्विज प्रतियोगिता, कविता वाचन, शब्दावली विकास गतिविधि तथा विभिन्न रचनात्मक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में पुस्तकों के प्रति रुचि, जिज्ञासा और ज्ञानार्जन की भावना को प्रोत्साहित किया गया। विद्यालय के निदेशक अरुणेंद्र कुमार ने कहा कि पुस्तकें ज्ञान, संस्कार और व्यक्तित्व निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में भी नियमित पठन विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, रचनात्मक और जागरूक नागरिक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विद्यालय के प्रधानाचार्य जे.के. शर्मा ने कहा कि पी.एन. पनिक्कर का जीवन ज्ञान के प्रसार और पुस्तकालय संस्कृति के विस्तार की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन पुस्तकालय का उपयोग कर अपने ज्ञान का विस्तार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने नियमित रूप से पुस्तकें पढ़ने, पुस्तकालय का सदुपयोग करने तथा समाज में पठन संस्कृति को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। विद्यालय परिवार ने इस आयोजन को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल बताया।





