जल संरक्षण और आजीविका को प्राथमिकता, डीसी ने कहा- ‘प्लानिंग पहले, क्रियान्वयन बाद में’।
पाकुड़। पंचायतों में अब योजनाओं की संख्या बढ़ाने के बजाय जरूरत के मुताबिक विकास का खाका तैयार किया जाएगा। एक ही तरह की योजनाओं की बार-बार पुनरावृत्ति रोकने के साथ गुणवत्तापूर्ण और टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर जोर दिया जाएगा। मंगलवार को रविन्द्र भवन में आयोजित विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन फॉर गारंटी (ग्रामीण) योजना की जिला स्तरीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण में उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने अधिकारियों को यह निर्देश दिया। उपायुक्त ने कहा कि पंचायत को एक इकाई मानकर उसकी समग्र जरूरतों का आकलन किया जाए। सड़क, नाली, पेयजल, विद्यालय, आंगनबाड़ी और अन्य बुनियादी जरूरतों को चिह्नित कर अलग-अलग विभागों की योजनाओं के साथ अभिसरण किया जाए। इससे एक ही तरह के काम अलग-अलग योजनाओं से कराने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।
जल संरक्षण और आजीविका को पहली प्राथमिकता
उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने कहा कि ग्राम स्तर पर योजनाओं का चयन स्थानीय जरूरतों और प्राथमिकताओं के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने जल संरक्षण और जल संचयन से जुड़ी योजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। इसके बाद कृषि, चारा उत्पादन, पशुपालन और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने वाली आजीविका योजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि ग्रामीण आधारभूत संरचना का निर्माण केवल काम पूरा करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ऐसी परिसंपत्तियां बनाई जाएं, जो लंबे समय तक उपयोगी रहें और जल संरक्षण तथा आजीविका को भी बढ़ावा दें। मनरेगा, आजीविका मिशन, जल संरक्षण और स्वच्छ भारत मिशन की योजनाओं को आपस में जोड़कर बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।
पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने पर भी जोर
उप विकास आयुक्त ने पंचायतों को अपनी आय के स्रोत मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों और संभावित परफॉर्मेंस ग्रांट को ध्यान में रखते हुए पंचायतों को अपना राजस्व बढ़ाने की दिशा में गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने स्थानीय जरूरतों के आधार पर टिकाऊ और परिणामदायी ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) तैयार करने का निर्देश दिया।
‘प्लानिंग पहले, क्रियान्वयन बाद में’
उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने कहा कि पंचायतों में एक ही प्रकार की योजनाओं को बार-बार दोहराने से बचना होगा। वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले पंचायत की जरूरत, प्राथमिकता और उपलब्ध संसाधनों का आकलन कर समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि ‘प्लानिंग पहले, क्रियान्वयन बाद में’ की सोच के साथ काम करने से योजनाओं का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाया जा सकेगा। उन्होंने सार्वजनिक परिसरों की साफ-सफाई, झाड़ियों की सफाई, छोटे जलस्रोतों एवं जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार तथा सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव जैसे छोटे लेकिन जरूरी कार्यों को भी पंचायत की कार्ययोजना में शामिल करने की बात कही।
मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को भी मिलेगा प्रशिक्षण
उपायुक्त ने कहा कि कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मियों को मिली जानकारी पंचायत प्रतिनिधियों तक भी पहुंचनी चाहिए। इसके लिए पंचायत स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को गुणवत्तापूर्ण GPDP तैयार करने की प्रक्रिया समझाई जाए। उन्होंने कहा कि बेहतर योजना और विभिन्न योजनाओं के बीच समन्वय से पंचायतों को सशक्त, स्वावलंबी और विकसित बनाया जा सकता है।
कार्यशाला का उद्घाटन उपायुक्त मेघा भारद्वाज, उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल, अपर समाहर्ता जेम्स सुरीन और सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मास्टर ट्रेनर परियोजना पदाधिकारी मोतिउर रहमान, जेई सुजीत कुमार मंडल, डीआरपी अनंत मंडल और ऑपरेटर सनत कुमार मंडल ने योजना के प्रावधानों, कार्ययोजना निर्माण और क्रियान्वयन की जानकारी दी।








