पाकुड़। लोकसभा में पारित खनिज एवं खनिज विकास (संशोधन) विधेयक को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने कड़ा विरोध जताया है। झामुमो के पाकुड़ जिला अध्यक्ष अजीजुल इस्लाम ने इसे झारखंड के अधिकारों और आदिवासी-मूलवासी हितों पर सीधा हमला बताते हुए केंद्र सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग की है। अजीजुल इस्लाम ने कहा कि झारखंड देश के प्रमुख खनिज संपदा वाले राज्यों में है। यहां से निकलने वाले कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट समेत अन्य खनिजों से देश के विकास को गति मिलती है, लेकिन खनिज राजस्व में राज्य की हिस्सेदारी प्रभावित होने से राज्य की वित्तीय स्वायत्तता कमजोर होगी। इसका सीधा असर विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि खनिज से मिलने वाले राजस्व का उपयोग गरीब, मजदूर, किसान, महिलाओं, वृद्धों, दिव्यांगों और विद्यार्थियों के कल्याण में किया जाता है। राजस्व में कमी आने पर मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, सर्वजन पेंशन, गुरुजी क्रेडिट कार्ड, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन, बिरसा हरित ग्राम, पशुधन विकास, फूलो-झानो आशीर्वाद, छात्रवृत्ति और साइकिल वितरण जैसी योजनाओं के संचालन पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। झामुमो जिला अध्यक्ष ने कहा कि खनिज संपदा पर पहला अधिकार उस राज्य और वहां की जनता का होना चाहिए, जहां से उसका दोहन होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार राज्यों के अधिकारों को सीमित करने का प्रयास कर रही है। झारखंड की प्राकृतिक संपदा यहां के आदिवासी-मूलवासी समाज के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का आधार है।
अजीजुल इस्लाम ने कहा कि झामुमो झारखंड के संसाधनों और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगा। पार्टी ने केंद्र सरकार से खनिज संशोधन विधेयक पर पुनर्विचार करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।





