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August 28, 2026 12:33 am

पुलिस की लापरवाही पर कोर्ट सख्त, हत्यारे को उम्रकैद; डीजीपी और मुख्य सचिव को भेजी फैसले की कॉपी।

हथियार और खून से सने कपड़े कोर्ट में पेश नहीं किए, घायल पत्नी की गवाही से दोषी को सजा।

पाकुड़। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने हत्या और जानलेवा हमले के मामले में गुरुवार को दोषी सोबेन मरांडी को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने पाकुड़ जिला के महेशपुर थाना कांड संख्या 169/2023 पर पुलिस अनुसंधान में गंभीर लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताते हुए फैसले की प्रति झारखंड के मुख्य सचिव, डीजीपी और पाकुड़ एसपी को भेजने का निर्देश दिया है।

पांच गवाहों के भरोसे था केस, हथियार तक कोर्ट में पेश नहीं किया

सत्र परीक्षण संख्या 30/2024 की सुनवाई में अभियोजन ने पांच गवाह पेश किए। जांच अधिकारी कैला उरांव ने जब्ती सूची के प्रदर्श न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किए। हत्या में प्रयुक्त हथियार और खून से सने कपड़े भी न तो कोर्ट में पेश किए गए और न ही फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए। इंजरी रिपोर्ट भी रिकॉर्ड पर नहीं लाई गई। कुछ गवाह अपने बयान से मुकर गए।

चश्मदीद पत्नी की गवाही बनी निर्णायक कड़ी

पुलिस की जांच में खामियों के बावजूद लोक अभियोजक लुकास कुमार हेमरम ने अभियोजन का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि अनुसंधान की कमियों के कारण अपराधी को लाभ नहीं मिलना चाहिए। न्यायालय ने भी मामले की सच्चाई स्पष्ट करने के लिए मृतक की पत्नी, जो हमले में खुद घायल हुई थी, से कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। उसके जवाबों को अदालत ने विश्वसनीय मानते हुए मौखिक साक्ष्य को स्वीकार किया। इसी चश्मदीद गवाही के आधार पर अभियोजन अपना मामला साबित करने में सफल रहा।

चार धाराओं में सजा, सभी सजाएं साथ चलेंगी

धारा 302 में उम्रकैद और एक लाख रुपए जुर्माना, धारा 307 में उम्रकैद और 50 हजार रुपए जुर्माना, धारा 326 में सात साल सश्रम कारावास व 25 हजार रुपए जुर्माना तथा धारा 452 में पांच साल सश्रम कारावास व 25 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर प्रत्येक धारा में अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

पीड़िता को मिलेगा दो लाख रुपए मुआवजा

अदालत ने कुल दो लाख रुपए जुर्माने की राशि मृतक की पत्नी को मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया है। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत पीड़िता को अलग से उचित मुआवजा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

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