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September 7, 2026 3:24 am

संथाल परगना में जनसांख्यिकी बदलाव और घुसपैठ पर बाबूलाल मरांडी ने जताई चिंता, चुनाव आयोग से की सख्त जांच की मांग।

पाकुड़। संथाल परगना में बदलती जनसांख्यिकी और कथित अवैध घुसपैठ के मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को पाकुड़ में बड़ा बयान दिया। सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि संथाल परगना के सीमावर्ती जिलों, खासकर पाकुड़ और साहिबगंज में आबादी के स्वरूप में जिस तरह बदलाव सामने आया है, वह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं लगता। उन्होंने चुनाव आयोग से मतदाता सूची की गहन और तकनीकी जांच कराने की मांग की। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की सीमा से सटे इलाकों में बाहरी लोगों के आने और बसने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। इसका असर स्थानीय आबादी के अनुपात पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि संथाल परगना की 18 विधानसभा सीटों में मतदाता सूची की विशेष जांच जरूरी है, ताकि किसी भी गैर-भारतीय या फर्जी दस्तावेज के आधार पर बने मतदाता का नाम सूची में नहीं रहे।

पाकुड़ में आदिवासी आबादी घटी, मुस्लिम आबादी बढ़ी: मरांडी

प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने वर्ष 2001 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पाकुड़ जिले में आदिवासी आबादी का प्रतिशत 46.64 से घटकर 42.12 प्रतिशत हो गया, जबकि मुस्लिम आबादी 32.74 प्रतिशत से बढ़कर 35.87 प्रतिशत हुई। इसी तरह साहिबगंज में आदिवासी आबादी की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से घटकर 26.8 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी 28 प्रतिशत से बढ़कर 34.61 प्रतिशत होने का दावा उन्होंने किया। उन्होंने हाल के वर्षों में मतदाता संख्या में हुई वृद्धि को भी जांच का विषय बताया। मरांडी के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या करीब 24 प्रतिशत बढ़ी, जबकि मुस्लिम मतदाताओं की वृद्धि 40.9 प्रतिशत रही। वहीं गैर-मुस्लिम मतदाताओं की वृद्धि 11.4 प्रतिशत बताई गई। उन्होंने लिट्टीपाड़ा और महेशपुर विधानसभा क्षेत्रों में भी मतदाता वृद्धि के आंकड़ों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग से पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने की मांग की।

खतियान और पुरानी मतदाता सूची से हो सत्यापन

मरांडी ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर फर्जी वंशावली और जाली दस्तावेजों के आधार पर आधार कार्ड एवं मतदाता पहचान पत्र तैयार किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि संथाल परगना में एसपीटी एक्ट लागू है और यहां जमीन के हस्तांतरण को लेकर विशेष कानूनी प्रावधान हैं। इसके बावजूद बाहरी लोगों के बसने और जमीन पर कब्जे की शिकायतों की जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रहने के बजाय पुराने खतियान, वंशावली और पूर्व की मतदाता सूचियों से दस्तावेजों का तकनीकी मिलान कराया जाना चाहिए। इससे संदिग्ध नामों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
मरांडी ने कहा, संथाल परगना की डेमोग्राफी में जो बदलाव आया है, वह स्वाभाविक नहीं बल्कि कृत्रिम लगता है। चुनाव आयोग को विशेष जांच अभियान चलाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई अवैध या फर्जी व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो और गलत तरीके से दर्ज नाम हटाए जाएं। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल राजनीति का नहीं, बल्कि स्थानीय समाज, आदिवासी समुदाय और क्षेत्र की सामाजिक संरचना से जुड़ा विषय है। सामाजिक संगठनों की ओर से भी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और चुनाव आयोग को इस संबंध में पत्र भेजे जाने की बात उन्होंने कही।

सर्किट हाउस में जुटे भाजपा के नेता

प्रेस वार्ता के दौरान सर्किट हाउस में लिट्टीपाड़ा के पूर्व विधायक दिनेश विलियम्स मरांडी, दुर्गा मरांडी, भाजपा जिलाध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष अमृत पांडे सहित पार्टी के अन्य नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद थे। बाबूलाल मरांडी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को गंभीरता से लेने और संदिग्ध मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

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