पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में गंदगी, बिजली की बदहाल स्थिति और ड्रेसिंग में देरी की शिकायत; जांच और कार्रवाई की मांग
पाकुड़। सदर अस्पताल, पाकुड़ की प्रसव व्यवस्था और मरीजों की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के लिए पहुंचने वाली महिलाओं को कथित तौर पर निजी नर्सिंग होम भेजे जाने, पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में गंदगी और बिजली की बदहाल स्थिति के साथ ऑपरेशन के बाद उचित देखभाल नहीं किए जाने की शिकायत सामने आई है। मामले को लेकर स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य विभाग से उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
निजी नर्सिंग होम भेजने के आरोप से उठे सवाल
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सदर अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के मामलों में मरीजों के परिजनों को कथित तौर पर डराकर या बरगलाकर निजी नर्सिंग होम जाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इस वजह से अस्पताल की प्रसव व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और स्वतंत्र जांच होना अभी बाकी है।
पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में बदइंतजामी की शिकायत
अस्पताल के पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड की स्थिति को लेकर भी गंभीर शिकायतें की गई हैं। आरोप है कि वार्ड में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं थी और केवल एक पंखा चल रहा था, जबकि अन्य पंखे बंद पड़े थे। बिजली का बोर्ड खुला और असुरक्षित स्थिति में होने की बात भी सामने आई है। ऐसी स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। वहीं, वार्ड में इस्तेमाल किए जा रहे गद्दों के गंदे और बदरंग होने की शिकायत है। प्रसव के बाद महिलाओं की देखभाल के लिए इस्तेमाल होने वाले वार्ड में साफ-सफाई की कमी से संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है।
ऑपरेशन के बाद ड्रेसिंग में देरी का आरोप।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, सिजेरियन ऑपरेशन के पांच से छह दिन बाद भी कुछ मरीजों की समय पर और उचित तरीके से ड्रेसिंग नहीं की जा रही है। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है, तो यह मरीजों की देखभाल में गंभीर चूक का मामला हो सकता है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन से मामले की जांच कराकर उपचार और ड्रेसिंग की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की गई है।
उपाधीक्षक के रवैये पर भी उठे सवाल
मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं ने अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. सोहेल से सवाल किए। आरोप है कि मरीजों की समस्याओं और अस्पताल की व्यवस्था पर स्पष्ट जवाब देने के बजाय उन्होंने पूर्व प्रभारी डॉ. मनीष की कार्यशैली का हवाला दिया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस पहल करने के बजाय जिम्मेदारी को लेकर बहस होती रही। हालांकि, इस संबंध में उपाधीक्षक का पक्ष सामने आना बाकी है।
जांच नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
सदर अस्पताल की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद स्थानीय नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की जानी चाहिए। साथ ही, प्रसव सेवाओं, पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड की साफ-सफाई, बिजली व्यवस्था और ऑपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल की समीक्षा कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्य स्तर पर स्वास्थ्य विभाग एवं स्वास्थ्य मंत्री को लिखित शिकायत भेजी जाएगी। इसके बावजूद समस्या बनी रहने पर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा।








