खुद 20 से अधिक बार कर चुके हैं रक्तदान, अब तक हजारों लोगों को रक्तदान के लिए कर चुके हैं प्रेरित
पाकुड़। किसी अनजान की जिंदगी बचाने के लिए अपना खून देना और जरूरत के वक्त किसी मरीज के लिए रक्तदाता का इंतजाम करना, इंसानियत की इससे बड़ी मिसाल शायद ही कोई हो। इसी जज्बे के साथ उसमान गनी और नासिमा दिलकस रक्तदान के क्षेत्र में लगातार मानवता की सेवा कर रहे हैं। दोनों ने साबित किया है कि इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता और किसी की जान बचाने से बड़ा कोई नेक काम नहीं है।
मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल) के बहरामपुर निवासी उसमान गनी और बिहार के भागलपुर की नासिमा दिलकस खुद 20 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। इतना ही नहीं, अपने प्रयासों से अब तक हजारों लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित कर चुके हैं। जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने और लोगों के बीच रक्तदान के प्रति जागरूकता फैलाने में दोनों की भूमिका सराहनीय रही है।
उनका मानना है कि अस्पताल में भर्ती किसी मरीज के लिए समय पर रक्त मिलना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन सकता है। रक्त का कोई कृत्रिम विकल्प नहीं है। ऐसे में समाज के हर सक्षम व्यक्ति को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। रक्तदान से न केवल किसी की जान बचाई जा सकती है, बल्कि समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना भी मजबूत होती है। उसमान और नासिमा का यह प्रयास उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो छोटी-छोटी बातों में धर्म और जाति की दीवारें खड़ी कर देते हैं। दोनों का संदेश साफ है कि जरूरतमंद की मदद करते समय उसकी पहचान नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी मायने रखती है।
इनका संदेश है— रक्तदान केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि किसी अनजान को जीवन देने का सबसे बड़ा मानवीय उपहार है। खुद रक्तदान करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।






