1 नवंबर से RCM, 2% GST TDS और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के प्रावधानों में बदलाव; बिलिंग और टैक्स अनुपालन दुरुस्त रखने की सलाह
स्क्रैप और वेस्ट कारोबार से जुड़े व्यापारियों के लिए 1 नवंबर 2026 से GST के नए प्रावधान लागू हो गए हैं। इन बदलावों को लेकर GST विशेषज्ञ एडवोकेट सूरज टिबरीवाल ने कारोबारियों को सतर्क रहने और अपनी टैक्स अनुपालन व्यवस्था समय रहते अपडेट करने की सलाह दी है। एडवोकेट सूरज टिबरीवाल के अनुसार, नए प्रावधानों के तहत कुछ निर्धारित श्रेणियों के स्क्रैप और वेस्ट की खरीद-बिक्री पर टैक्स संबंधी जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। खासकर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म (RCM), GST TDS और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन के प्रावधानों को समझना कारोबारियों के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया कि पंजीकृत खरीदार यदि गैर-पंजीकृत सप्लायर से इस्तेमाल किया हुआ कुकिंग ऑयल, प्लास्टिक स्क्रैप, पुराने टायर का स्क्रैप और इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट खरीदते हैं, तो निर्धारित प्रावधानों के तहत खरीदार को RCM के माध्यम से GST जमा करना होगा। वहीं, पंजीकृत कारोबारियों के बीच निर्धारित श्रेणियों के स्क्रैप की खरीद पर शर्तें पूरी होने की स्थिति में 2 प्रतिशत GST TDS काटने का प्रावधान है। इसमें मेटल स्क्रैप भी शामिल है। इसके अलावा संबंधित श्रेणियों के सप्लायरों के लिए GST रजिस्ट्रेशन के नियमों में भी बदलाव किया गया है। एडवोकेट सूरज टिबरीवाल ने कारोबारियों को सलाह दी कि वे अपने बिलिंग सिस्टम, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड, सप्लायर के GST स्टेटस और टैक्स भुगतान की प्रक्रिया की समीक्षा करें। नए प्रावधानों की अनदेखी करने से भविष्य में टैक्स संबंधी परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि कारोबारियों को किसी भी लेनदेन से पहले संबंधित GST प्रावधानों और अधिसूचनाओं की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।







