पति प्रीतम चंद्र का दावा—नजरुल अंसारी के साथ मिलकर रची गई साजिश, फर्जी वंशावली के सहारे सरकारी दस्तावेजों में बदला नाम।
प्रशासन ने ग्राम प्रधान समेत चार लोगों से मांगा जवाब
साहिबगंज। बरहेट में मतदाता सूची में कथित फर्जीवाड़े के जरिए एक महिला की पहचान बदलने का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। मिता देवी से फातिमा बीबी बनी महिला के मामले में अब उसके पति प्रीतम कुमार चंद्र ने सामने आकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि पत्नी से आज तक कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ, इसके बावजूद उसकी पहचान और धर्म बदल दिया गया। उन्होंने नजरुल अंसारी पर पत्नी को अपने प्रभाव में लेकर मतांतरण कराने और शादीशुदा जिंदगी उजाड़ने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
पति का आरोप—बिना तलाक कैसे बदल गई पहचान?
प्रीतम कुमार चंद्र के अनुसार, वर्ष 2012 में मिता देवी से उनकी शादी हुई थी। शादी के बाद उन्होंने बरहेट रोड में बूटी रेस्टोरेंट भी खोला था। इसी दौरान रेस्टोरेंट में काम करने वाले नजरुल अंसारी से उनकी पत्नी की नजदीकियां बढ़ीं। पति का आरोप है कि नजरुल ने मिता को अपने प्रभाव में लेकर उन्हें परिवार से अलग कर दिया और बाद में मतांतरण करा उसकी पहचान फातिमा बीबी कर दी गई। प्रीतम का सवाल है कि जब दोनों के बीच कानूनी तलाक ही नहीं हुआ तो मिता के आधार कार्ड समेत दूसरे दस्तावेजों में नाम और फोटो बदलने की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई? उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायत के बाद उनका घरेलू सामान भी जबरन घर से उठा लिया गया। हालात ऐसे बने कि उन्हें परिवार समेत गांव छोड़कर जाना पड़ा।
फर्जी वंशावली से सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर सवाल कथित फर्जी वंशावली को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि बरमसिया के नेजामुद्दीन मोमिन को फर्जी पिता दर्शाकर वंशावली तैयार की गई और उसी के आधार पर फातिमा बीबी की पहचान को सरकारी रिकॉर्ड में स्थापित करने की कोशिश हुई। एसआईआर के दौरान मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर इसकी जांच शुरू हुई।
ग्राम प्रधान की भूमिका भी जांच के घेरे में।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बरमसिया के ग्राम प्रधान सुनील दुबे, मिता देवी उर्फ फातिमा बीबी, कथित पिता नेजामुद्दीन मोमिन और सलामत अंसारी से स्पष्टीकरण मांगा है। मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए भी नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों के स्तर पर दस्तावेजों और वंशावली की जांच की जा रही है। ग्राम प्रधान के खिलाफ पद समाप्त करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई पर भी विचार किए जाने की जानकारी है।
अब जांच के निष्कर्ष पर टिकी नजरें।
इस पूरे प्रकरण ने पहचान, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया और सरकारी दस्तावेजों की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पति की ओर से लगाए गए जबरन मतांतरण, प्रताड़ना और साजिश के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का जवाब और प्रशासनिक जांच का अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।






