राजकुमार भगत
पाकुड। कई वर्षों के बाद माह अप्रैल में ही पारा 45 पार देखा जा रहा है । धूप इतनी तेज की लोगों का जीना दूभर हो जाए। इतनी तेज धूप और गर्म हवा तो लोग जैसे भूल ही गए थे। किंतु मौसम ने फिर करवट बदली और तेज धूप और गर्म चलती हवा का लोगों का एहसास कराया। इस धूप में लोगों को पीने के पानी के लिए परेशान होते देखा गया। इस बाजार से उस बाजार तक कहीं भी सरकार की ओर से जल व्यवस्था सड़क किनारे नहीं देखा गया। मजबूरी में लोग पानी की बोतल एवं अन्य ठंडाई खरीद कर पीते देखें गए। जिस प्रकार से ठंड के मौसम में अलाव की व्यवस्था होती है उसी प्रकार से नगर परिषद की ओर से स्थान विशेष पर जल की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि दूरदराज के लोग कम से कम पीने का पानी पी सके।
इस कड़ी धूप में तो कुछ देर के लिए रस्ता मानो ठहर सा गया हो । किंतु फिर वही काम काम फिर काम? कुछ देर विरान होने के बाद रास्ता में पुनः चहल-पहल बढ़ जाती है।
ठंडा समान बेचने वाले की है बल्ले बल्ले
जी हां बाजार में ठंड बोतल बंद पानी जैसा ग्राहक देखा वैसा बेचा ₹ 8 से 10 का पानी 15 से ₹20 में बेचे जा रहे हैं। अन्य ठंड पेय पदार्थ भी मैक्सिमम रिटेल प्राइस से 2 से ₹5 अधिक मूल्य में बेचे जा रहे हैं। कुछ पेय पदार्थ की दुकानें मारुति में देखे जा रहे हैं जो 10 से ₹20 में पेय बेच रहे हैं। इनकी केमिकल की भी जांच होनी चाहिए। लस्सी 30 से ₹40 प्रतिग्लास मिल रहे हैं । वह तो भला हो ईख रस बालों का जो मात्र ₹10 प्रति ग्लास में ओरिजिनल ईख के रस सामने निकाल कर दे रहे। इससे कुछ राहत पा रहे हैं। चिकित्सकों की माने तो बाजार में बिकने वाले केमिकल युक्त पेय पदार्थ से लोगों को बचना चाहिए। उसके स्थान पर ओआरएस , लस्सी , ईख या अन्य फलों के ताजा रस पेय पदार्थ के रूप में ले और तेज चलती गर्म हवा से बचें। प्याज और कच्चे आम का प्रयोग करें। जहां तक हो सके दोपहर में घर से बाहर ना निकले ।







