सतनाम सिंह
आदिवासी सेंगेल अभियान के सदस्यों ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम बुधवार को बीडीओ महेशपुर उमेश मंडल के हाथों एक ज्ञापन सौंपा गया. दिए गए ज्ञापन में उल्लेख किया है कि झारखंड के मुख्यमंत्री आपने पंडित रघुनाथ मुर्मू के जन्मदिवस पर 5 मई 2023 को उनके दंडबोस गांव उड़ीसा जाकर उनके सपनों को अपमानित ही किया है क्योंकि झारखंड में संताली भाषा को ओलचिकी लिपि के साथ अभी तक राजभाषा का दर्जा नहीं दिया है. उल्टा मुख्यमंत्री के अनेक ईसाई मिशनरी और जेएमएम के एमएलए/ एमपी इसका विरोध क्यों करते हैं, साथ ही मरांग बुरु (पारसनाथ पहाड़ गिरिडीह झारखंड) को भारत सरकार 5 जनवरी 2023 को पत्र लिखकर जैनों के हाथों बेचने का काम क्यो किया है, साथ ही सरना धर्म कोड के जगह साधना आदिवासी धर्म कोड 11 नवम्बर 2020 को पारित करके बिना राज्यपाल के हस्ताक्षर के दिल्ली भेजा है, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कुर्मी /महतो समुदाय को आदिवासी बनाने का 8 फरवरी 2018 को अनुशंसा हस्ताक्षर करके असली आदिवासियों के गले में फांसी का फंदा लटकाने का काम किया है. आदिवासी स्वशासन व्यवस्था में जनतांत्रिक और संवैधानिक सुधार लाने के बदले वंशानुगत नियुक्ति मांझी परगना मनकी मुंडा आदि को प्रलोभन देकर वोट बैंक की सुविधा के लिए उनको भटकाने का काम क्यो करते है. मौके पर ब्लॉक सेंगेल परगना के सोलेमान किस्कू, संताल परगना महासचिव मदन मुर्मू, पाकुड़ जिला सभापति आदिवासी सेंगेल अभियान सनातन हेंब्रम सहित सैकड़ों सेंगेल कार्यकर्ता मौजूद थे.




