सतनाम सिंह
क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से संताल हुल के इतिहास, हुल के कारण, परिणाम, संतालो के इतिहास, संस्कृति पाठ त्योहार रिती रिवाज संबंधित बातों से अवगत कराया गया।
168 वा संताल हुल 1855_ 56 स्मृति के अवसर पर संताल हुल उयहार हुलगार बैसी और संताल परगना महाविद्यालय,दुमका के छात्रछात्राएं के संयुक्त तत्वाधान में आज दिनांक 25 जून 2022 को लिखित क्विज प्रतियोगिता कार्यक्रम आयोजन किया गया। इस लिखित क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से संताल हुल के इतिहास, हुल के कारण, परिणाम, संतालो के इतिहास, संस्कृति पाठ त्योहार रिती रिवाज एवं वर्तमान परिपेक्ष की विभिन्न घटनाओं से प्रश्न पूछा गया। लिखित क्विज प्रतियोगिता के मध्यम से छात्र-छात्राओं विभिन प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल के लिए प्रेरित करना ही मुख्य उद्देश्य है।संताल हुल के अगुवाई सिदो कन्हू, चांद भैरो मुर्मू एवं अनगिनत वीर सपूतों की संघर्षगाथा, उनके मार्ग दर्शन को याद करते हुए वर्तमान परिपेक्ष में आदिवासियों की सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, जल जंगल जमीन, आदिवासियों की स्वशासन व्यवस्था, पर्व त्योहारों , आदिवासी की पहचान अस्मिता एवं अस्तित्व को संरक्षण कायम रखने की परिकल्पना की गई है। 168 वा संताल हुल 1855 56 स्मृति की लिखित क्विज प्रतियोगिता परीक्षा संताल परगना प्रमंडल के अंतर्गत संताल परगना महाविद्यालय दुमका, गोड्डा कॉलेज गोड्डा, के०के०एम०कॉलेज पाकुड़, एवं साहिबगंज कॉलेज साहिबगंज में आयोजित की गई है। संताल परगना महाविद्यालय में कुल 67,गोड्डा कॉलेज गोड्डा मे 130, के०के०एम० कॉलेज पाकुड़ मे 53 और साहिबगंज कॉलेज साहिबगंज में 57 छात्र-छात्राएं शामिल हुए। सर्वविदित हैं कि संताल हुल एशिया महादेश के सबसे पहले जनक्रांति की शुरुवात हमारे पूर्वजों ने प्रारंभ क्या था। जिन्हे हम संताल हुल के नाम से विश्व प्रसिद्ध है। हमारे वीर सपूत तिलका मांझी मुर्मू,शाम टुडू (परगना), हाड़मा देश मांझी, गरभू मांझी, सिदो कन्हू मुर्मू, चंपई, लोखोन, आदि सपूतो ने जन की बलिदान हमारे भावी पीढ़ी के लिए किया था। उन्होंने ने ही एक अलग राज्य (संताल परगना) 22 दिसंबर 1855 को ऑटोनोमस जिला का गठन हुआ था। वर्तमान मे संताल परगना प्रमंडल की स्थिति से सभी कोई वाकिप हैं। संताल परगना के जल जंगल जमीन,आदिवासियो की पहचान अस्मिता, संवैधानिक, कानूनी और स्वशासन पारंपारिक हक अधिकार और सामाजिक व्यवस्था को बर्बाद करने की साजिश जोरो से चल रही है। हुल क्विज प्रतियोगिता के मध्यम से आदिवासियो के सामाजिक मुद्दों को बनाए रखने की कोशिश की गई है। इस लिखित क्विज प्रतियोगिता को के०के ०एम०कॉलेज पाकुड़ में सफल बनाने के लिए कमल मुर्मू , छात्रनेता, बजल टुडू (वरिष्ठ छात्रनायक), चैतन मुर्मू(उप_छात्रनायक),कैलाश मरांडी विनयलाल मरांडी,नवीन हंसदा, संतोष मरांडी,बबलू मुर्मू ,परीक्षक ठाकुर हंसदाक आदि सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।








