राजकुमार भगत
पाकुड़। 30 जून को हूल क्रांति दिवस के अवसर पर होड़ क्लब पाकुड़ द्वारा चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच ढोल नगाड़ा के साथ पारंपरिक वेशभूषा में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले आदिवासियों की शौर्य और बलिदान के प्रतिरूप वीर सिद्धू कानू चांद भैरव के को स्मरण करते हुए नगर भ्रमण निकाला गया। इस दौरान सदस्यों द्वारा वीर सिद्धू कानू अमर रहे। आदि का नारा लगाया गया। ट्रैक्टर पर वीर सिद्धू कानू की प्रतिमा स्वरुप बनाकर नगर में आम जनता के बीच नगर में भ्रमण करते हुए नगर में स्थापित वीर सिद्धू कानू की प्रतिमा, डॉक्टर अंबेडकर की प्रतिमा, महाराणा प्रताप की प्रतिमा, गांधी जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण संस्था के सदस्यों द्वारा किया गया। संथाली भाषा में हूल का अर्थ क्रांति होता है। आदिवासी समाज इस दिन को अपने संघर्ष और अंग्रेजों के द्वारा मारे गए अपने 20000 लोगों की याद में मनाते हैं। अब सभी लोग मिलकर इसे वृहद रूप में मना रहे हैं।









