सतनाम सिंह
देश को आजाद हुए 76 साल हो गए,एक तरफ देश डिजिटल इंडिया की तरफ बढ़ रहा है, लेकिन झारखंड के पाकुड़ जिले का टांडभीटा गांव अब भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार कर रहा है. झारखंड के अलग राज्य बने भी दो दशक से अधिक वक्त बीत गया लेकिन जंगल से घिरे पहाड़ पर बसे गांव की न तो तस्वीर बदली और न ही यहां बसे लोगों की तकदीर,वर्ष 2000 में बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बना तो गांव में आदिवासी समुदाय के लोगों ने सोचा था कि अब इलाके का तेजी से विकास होगा. लेकिन उनका ये सपना सपना ही रह गया, हकीकत में तब्दील नहीं हो सका…
पाकुड जिले के लिट्टीपाड़ा प्रखंड के कुंजबोना पंचायत के तहत आने वाले टांडभीटा गांव के बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीना पड़ रहा है. टांडभीटा गांव में खंभे, बिजली के तार सबकुछ लगे हैं। महज नहीं है तो सिर्फ विद्युत तार में दौडऩे वाला करंट। शाम होते ही पूरे गांव में अंधेरा पसर जाता है….. टांडभीटा गांव के लोग लालटेन की रोशनी में जीने को मजबूर हैं, टांडभीटा के ग्रामीण गांव से दो किलो मीटर दूर से झरने की पानी से बुझाते है अपनी प्यास….. गांव में आज तक पक्की सड़क नही बन पाई है…. टांडभीटा गांव में 45 परिवार आदिवासी है जो मूल भूत सुविधा से कोसो दूर है…. को लेकर ग्रामीण कई बार विभाग शिकायत किया है,लेकिन इनका सुनने वाला कोई नहीं है…









