राजकुमार भगत
पाकुड़। इस वर्ष कार्तिक माह की त्रयोदशी तिथि 10 नवंबर को 12:35 से धनतेरस की तिथि प्रारंभ हो रहा है जो 11 नवंबर को दोपहर 1:57 पर समाप्त होगा। इस दिन प्रदोष काल का समय 5:30 से प्रारंभ होकर 8 मिनट तक रहेगा।
*धनतेरस का महत्व*
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि अपने हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे । धन्वंतरि जी को विष्णु भगवान का अवतार माना जाता है। धनतेरस को उनके प्रगतय उत्सव के रूप में मनाया जाता है । इस दिन प्रदोष काल में माता लक्ष्मी गणेश कुबेर एवं धनवंतरी की पूजा अर्चना की जाती है एवं खरीदारी की जाती है । ऐसा माना जाता है की धनतेरस के दिन खरीदारी से संपत्ति में 13 गुना की वृद्धि होती है। धनतेरस से ही दीपावली उत्सव मनाने की कार्यक्रम शुरू होता है जो भैया दूज पर खत्म होता है।
*खरीदारी का शुभ मुहूर्त*
धनतेरस की खरीदारी की शुभ मुहूर्त 10 नवंबर दोपहर 12:35 से 11 नवंबर के दोपहर 1:57 तक रहेगी। इस मुहूर्त में सोने चांदी बर्तन, पूजन सामग्री आदि की खरीदारी करते हैं।
*पूजा का शुभ मुहूर्त*
धनतेरस की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। 10 नवंबर को प्रदोष काल का समय शाम 5:30 से 8:08 तक रहेगा। इस बीच 5:45 से 7: 43 तक माता लक्ष्मी, गणेश जी, भगवान कुबेर एवं धनवंतरी जी की पूजा कर सकते हैं । जिसकी कुल अवधि 1 घंटा 56 मिनट की होगी । फूल माला आटे की हलवा गुड़ धनिया के बीज बूंदी के लड्डू वस्त्र धूप दीप से पूजा करनी चाहिए। घी के 13 दिया जलाना चाहिए। वृषभ कल संध्या 5:48 से 7:44 तक रहेगा।
*नरक चतुर्दशी एवं दीपावली भैया दूज*
10 नवंबर को धनतेरस इसके बाद नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली 11 नवंबर, दीपावली और लक्ष्मी पूजा 12 नवंबर , स्थान विशेष पर महाकाली पूजा रात 12:00 बजे से । गोवर्धन पूजा 13 नवंबर और भैया दूज 14 व 15 नवंबर के दिन मनाई जाएगी।
नोट – तथ्य आपके पंडित जी से अलग हो सकते हैं ।आप अपने पंडित जी से सही तथ्य की जानकारी दें प्रेस इसकी जिम्मेदारी नहीं लेती।






