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June 11, 2026 9:12 pm

पाकुड़ में बड़ा हादसा टला: शहरकोल में टूटकर आंगन में गिरा 11 हजार वोल्ट का तार, बाल-बाल बचे दर्जन भर लोग।

पाकुड़ बिजली विभाग की घोर लापरवाही के कारण गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।पाकुड़-हिरणपुर मुख्य सड़क के किनारे शहरकोल में अचानक 11,000 वोल्ट (11 KV) का हाई वोल्टेज बिजली का तार टूटकर एक घर के आंगन में जा गिरा। तार गिरने से पहले उसमें भीषण आग लग गई थी। इस घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस वक्त यह हादसा हुआ, अगर समय रहते लोग वहां से नहीं हटते तो कम से कम 10 से 12 लोग इस हाई वोल्टेज तार की चपेट में आ सकते थे। गनीमत रही कि एक बड़ी अनहोनी टल गई।

सुचना के बाद भी दोबारा चालू कर दी लाइन, भड़के ग्रामीण

ग्रामीणों ने बताया कि तार में आग लगने और उसके टूटने की जानकारी तुरंत फोन पर बिजली विभाग को दी गई, जिसके बाद बिजली काटी गई। लेकिन विभाग की लापरवाही की हद तब पार हो गई, जब फॉल्ट को ठीक किए बिना ही कुछ देर बाद दोबारा लाइन चालू कर दी गई। लाइन चालू होते ही फिर से वही स्थिति पैदा हो गई, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। इस घटना को लेकर शहरकोल के निवासियों में बिजली विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश और भय का माहौल है।

खतरे के साए में 500 परिवार, कवर लगाने की मांग ठंडे बस्ते में

स्थानीय निवासियों का कहना है कि गर्मी का मौसम आते ही इस तरह की घटनाएं यहां आम हो जाती हैं। 11,000 वोल्ट के इस जर्जर तार के नीचे करीब 500 से अधिक घर बसे हुए हैं। ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग से इस रूट को बदलने या कम से कम तारों पर इंसुलेटेड कवर लगाने की मांग की है, ताकि किसी की जान को खतरा न हो। लेकिन विभाग हमेशा की तरह कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है और किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।”घर तो बाद में बने, तार पहले से था” — कार्यपालक अभियंता का गैर-जिम्मेदाराना बयान

इस पूरे मामले पर जब बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता से फोन पर संपर्क किया गया, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना और असंतोषजनक रहा। उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि लोगों के घर बनने से पहले से वहां 11,000 वोल्ट का तार लगा हुआ था।

सुलगता सवाल: अगर कल को कोई अनहोनी हुई, तो जिम्मेदारी किसकी?

कार्यपालक अभियंता का यह बयान बिजली विभाग की संवेदनहीनता को दर्शाता है। सवाल यह उठता है कि क्या पहले से तार होने का मतलब यह है कि विभाग जर्जर तारों की सुध नहीं लेगा? अगर आज इस हादसे में किसी ग्रामीण की जान चली जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस हाई वोल्टेज तार को आबादी वाले क्षेत्र से नहीं हटाया गया या इस पर सुरक्षा कवर नहीं लगाया गया, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

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