अब्दुल अंसारी
पाकुड़िया (पाकुड़) लोक कल्याण सेवा केंद्र देवीनगर के द्वारा पाकुड़िया प्रखंड अंतर्गत खजूरडंगाल और बासेतकुंडी पंचायत के ग्राम प्रधान का एकदिवसीय उन्मुखिकरण कार्यशाला का आयोजन सोमवार को वासेतकुंडी पंचायत भवन में दीप प्रजवलित कर किया गया । उपस्थित ग्राम प्रधान को बताया गया कि पंचायत प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम 1996 जिसे संक्षेप में पेसा अधिनियम कहा जाता है । भारत के अनुसूचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए पारंपरिक ग्राम सभाओं के माध्यम से स्वशासन सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार द्वारा अधिनियमित एक कानून है। पेसा अधिनियम के तहत भारत के 10 राज्य आते हैं पर झाखण्ड तक पूर्ण रूप से कानून लागू नही किए है ,.उसके बाद झारखंड के परमपरागत् समुदायिक रीति रिवाज व नेतृव कर्ता ग्राम प्रधान, परानिक, जोग मांझी, गुरित् के जिमेदारी के बारे मे बाताया गया स्थानीय स्वशासन का अर्थ है नागरिकों का अपने ऊपर स्वयं का शासन अर्थात लोगों की अपनी शासन व्यवस्था। स्थानीय शासन सत्ता के विकेन्द्रीयकरण पर आधारित है और इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय क्षेत्र के निवासियों का कल्याण एवं विकास करना होता है अंत मे गाँव का प्रत्येक वयस्क, जिसकी उम्र 18 वर्ष है, ग्राम सभा को रूप प्रदान करता है। ग्राम सभा के कार्य(i) यह पूरे गाँव के लिए निर्णय लेने वाली संस्था है। (ii) पंचायतों का काम ग्राम-सभा की देख-रेख में चलता है। (iii) यह ग्राम पंचायत विकास योजना बनाने मे मदद करती है। ग्राम सभा का कार्य ग्राम पंचायत के कार्यों का अवलोकन करना होता है। ग्राम सभा पंचायत को मनमाने ढ़ंग से काम करने से रोकती है। ग्राम सभा की बैठक के दौरान सभी सदस्य को ग्राम पंचायत के गलत कार्यों और पैसों के दुरूपयोग के सम्बंध में सवाल उठाने का अधिकार होता है । इसलिए सभी लोगों को ग्राम सभा की बैठक में भाग लेना चाहिए । मौके पर कार्यक्रम में संस्था के सभी कर्मी का सहयोग सराहनीय रहा ।







