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October 28, 2026 10:54 am

पैनम कोल खनन में 600 करोड़ की गड़बड़ी के संकेत, प्राथमिकी की तैयारी में एसीबी

हाईकोर्ट में जांच एजेंसी का खुलासा, लीज से अधिक कोयला खनन करने का आरोप; 30 अक्टूबर तक शपथपत्र मांगा, 5 नवंबर को अगली सुनवाई।

रांची/पाकुड़। पाकुड़ जिले में पैनम कोल माइंस कंपनी के कथित अवैध खनन मामले में करीब 600 करोड़ रुपये की अनियमितता के प्रथमदृष्टया साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने यह जानकारी दी। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की प्रारंभिक जांच जारी है और मिले साक्ष्यों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। मामले की सुनवाई के दौरान एसीबी ने कहा कि फिलहाल कंपनी के निदेशक का बयान तत्काल दर्ज करना आवश्यक नहीं है। वहीं, अदालत ने जांच एजेंसी को अपने पक्ष और जांच की स्थिति से संबंधित जानकारी शपथपत्र के माध्यम से 30 अक्टूबर तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई पांच नवंबर को होगी।

निदेशक की पेशी पर अदालत ने दी राहत।

सुनवाई के दौरान पैनम कोल कंपनी के निदेशक की ओर से आवेदन दाखिल कर बताया गया कि एसीबी ने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है, लेकिन अस्वस्थता के कारण वह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने में असमर्थ हैं। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या प्रतिनिधि के माध्यम से पक्ष रखने की अनुमति मांगी थी। एसीबी का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर निदेशक की उपस्थिति आवश्यक नहीं है। इसके साथ ही कंपनी की ओर से दाखिल आवेदन का निष्पादन कर दिया गया।

लीज से अधिक खनन का आरोप।

यह मामला पाकुड़ और दुमका जिले में पैनम कोल माइंस कंपनी को मिले कोयला खनन पट्टे से जुड़ा है। याचिकाकर्ता राम सुभग सिंह ने जनहित याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि कंपनी ने निर्धारित लीज की सीमा से अधिक कोयले का खनन किया, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले की जांच होने के बावजूद संबंधित रिपोर्ट के आधार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

आयुक्त की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं होने का मामला।

पैनम कोल माइंस से जुड़े मामले में दुमका के प्रमंडलीय आयुक्त की 19 अक्टूबर 2015 की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के आलोक में राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने असंतोष जताया था। इसके बाद अदालत ने मामले की प्रारंभिक जांच एसीबी को सौंपी। अब जांच में करीब 600 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता के साक्ष्य मिलने की जानकारी सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर है। हालांकि, यह प्रारंभिक जांच का निष्कर्ष है। अनियमितता की अंतिम पुष्टि और आरोपों की कानूनी स्थिति जांच तथा आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

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