झारखंड सरकार पर भ्रष्टाचार, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में विफलता का लगाया आरोप।
राजकुमार भगत
पाकुड़। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पाकुड़ द्वारा झारखंड सरकार के विरुद्ध स्थानीय सिद्धू कान्हू पार्क के निकट छात्र गर्जना कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रांत मंत्री सौरव झा जी उपस्थित रहे। उन्होंने वर्तमान झारखंड के परिदृश्य पर अपना विचार रखते हुए कहा कि। 2019 के विधानसभा चुनाव में विद्यार्थियों को शिक्षा, युवाओं को रोजगार और महिलाओं को सुरक्षा एवं समान अधिकार के वादे पर राज्य की जनता हेमंत सोरेन को अवसर प्रदान किया। लेकिन राज्य झारखंड आज भी गरीबी और कमजोर प्रशासन की मार झेल रहा है। देश के 40 प्रतिशत खनिज संपदा से परिपूर्ण इस राज्य में आज भी लगभग 40 प्रतिशत लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। 20 प्रतिशत शिशु और बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। राज्य सरकार के मंत्री एवं कई अधिकारियों ने झारखंड को लूट खंड बना कर रख दिया है। मुख्यमंत्री और मंत्रियों एवं सत्ताधारी राजनीतिक दलों के अधिकारियों ने भी राज्य को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। इनके द्वारा खुलेआम जल, जंगल एवं जमीन को मिटाने का प्रयास किया गया।
विभाग संयोजक अमित साहा ने बताया कि फूलो-झानो के रक्त से सिंचित संथाल की महिलाएं आज स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। बिलखती महिलाएं- तड़पता झारखंड, सरकार के पूरे कार्यकाल पर एक प्रश्न चिन्ह लगाता है? सरकारी आंकड़ों के अनुसार आदिवासी समाज की जनसंख्या में 10 प्रतिशत की गिरावट हुई। बांग्लादेशी घुसपैठ और धर्मांतरण अपने चरम पर है।साल में 5 लाख युवाओं को रोजगार देने का वादा हो अथवा झारखंड की बेटियों को प्राथमिक विद्यालय से पीएचडी तक की मुफ्त शिक्षा का वादा, राज्य की महिलाओं को चूल्हा भत्ता देने का वादा हो अथवा राज्य के जनमानस को उत्तम स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाने का वादा, सरकार अपने हर वादे को पूरा करने में पूरी तरह से नाकाम रही है। अपने पूरे कार्यकाल में झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस एवं राजद गठबंधन की यह सरकार पूरी तरह से विफल रही है।विगत 5 वर्षों में शिक्षा वेंटिलेटर पर आ चुकी है।यहां ना तो विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति है ना तो कॉलेज में नियमित प्रधानाचार्य। शिक्षक की कमी का असर गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई पर हो रही है।आखिर इस सब का जवाबदेह कौन है। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति अत्यंत ही दयनीय और चिंताजनक है। हेमंत सरकार और उसके भ्रष्ट तंत्र को तनिक भी फर्क नहीं पड़ता कि कौन गरीब,आदिवासी और बेसहारा उनकी भ्रष्टता के रफ्तार में कुचलते जा रहे हैं ।झारखंड राज्य में व्याप्त अराजकता एवं विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक, रोजगार, स्वास्थ्य, महिला सुरक्षा के विषय पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा जारी “काला दस्तावेज” झारखंड सरकार के निरंकुशता का परिणाम है।






