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January 16, 2026 6:57 pm

पीएम मत्स्य सम्पदा योजना से बदली तकदीर

बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर रमेश सोरेन बने आत्मनिर्भर, सालाना 2.10 लाख की आय।

पाकुड़ | केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ग्रामीण युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मजबूत मिसाल बन रही है। पाकुड़िया प्रखंड के मोहनपुर गांव के रहने वाले रमेश सोरेन ने बायोफ्लॉक तकनीक अपनाकर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि गांव के युवाओं के लिए रोजगार की नई राह भी दिखाई है। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले रमेश सोरेन को सीमित संसाधनों के कारण परिवार चलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। इसी बीच उन्हें जिला मत्स्य कार्यालय, पाकुड़ के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना की जानकारी मिली, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।

7 टैंक से शुरू हुआ आत्मनिर्भरता का सफर

वर्ष 2023-24 में रमेश सोरेन ने योजना के तहत 07 टैंक बायोफ्लॉक यूनिट के लिए आवेदन किया। इस परियोजना की कुल लागत 7.50 लाख रुपये रही। अनुसूचित जनजाति वर्ग से होने के कारण उन्हें 60% अनुदान, यानी 4.50 लाख रुपये की सहायता राशि मिली।
मत्स्य विभाग झारखंड और जिला मत्स्य कार्यालय पाकुड़ के तकनीकी सहयोग से उन्होंने सफलतापूर्वक बायोफ्लॉक यूनिट स्थापित की और मत्स्य पालन शुरू किया।

सालाना 1400 किलो मछली, 2.10 लाख की आमदनी

बायोफ्लॉक तकनीक के जरिए रमेश सोरेन हर साल करीब 1400 किलोग्राम मछली का उत्पादन कर रहे हैं। इससे उन्हें लगभग 2.10 लाख रुपये की वार्षिक आय हो रही है। इस आय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और स्थायी आजीविका का साधन मिला है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा

रमेश सोरेन की सफलता यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग और मेहनत से ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वरोजगार के बड़े अवसर पैदा किए जा सकते हैं। आज वे अपने गांव और आसपास के इलाकों के युवाओं को बायोफ्लॉक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

योजना ने दिया सम्मानजनक जीवन

रमेश सोरेन ने योजना से मिले लाभ के लिए सरकार और जिला प्रशासन का आभार जताया है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर सम्मानजनक जीवन दिया है।

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