पाकुड़। जिला मत्स्य कार्यालय परिसर में शुक्रवार को राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। कार्यक्रम में मत्स्य पालकों को आधुनिक तकनीक, सरकारी योजनाओं और स्वरोजगार के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि मत्स्य पालन अब केवल पारंपरिक आजीविका या मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि तेजी से विकसित होता एक बड़ा उद्योग बन चुका है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। कार्यक्रम में नगर परिषद अध्यक्ष सबरी पाल, सहायक मत्स्य निदेशक रचना निश्चल, जिला मत्स्य पदाधिकारी काजल तिर्की, जिला सहकारिता पदाधिकारी चंद्रशेखर खालको, जिला पशुपालन पदाधिकारी नीरज कुमार गुप्ता तथा नाबार्ड के डीडीएम प्रेम कुमार मौजूद रहे। इस दौरान मत्स्य पालकों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई। नाबार्ड के डीडीएम प्रेम कुमार ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से उपलब्ध ऋण सुविधाओं की जानकारी दी, जबकि जिला सहकारिता पदाधिकारी चंद्रशेखर खालको ने मत्स्यजीवी सहयोग समिति के गठन और उसके लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देते हुए ब्लॉकचेन तकनीक के माध्यम से निबंधित नसीपुर मत्स्यजीवी सहयोग समिति के चार चयनित लाभार्थियों के बीच मत्स्य बीज का वितरण किया गया। वहीं सरकारी राजस्व का समय पर भुगतान करने वाले दो प्रगतिशील मत्स्य पालकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
जिला मत्स्य पदाधिकारी काजल तिर्की ने राष्ट्रीय मत्स्य कृषक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक और कृत्रिम प्रजनन प्रणाली के विकास से मत्स्य पालन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आया है। अब मत्स्य पालकों को मछली के अंडों के लिए गंगा नदी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से मत्स्य उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है और यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है।






