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May 9, 2026 8:47 pm

पाकुड़ नगर निकाय के चुनाव ना होने से आम जनता हो रही प्रभावित

सुदीप कुमार त्रिवेदी

किसी लोकतांत्रिक देश में त्रिस्तरीय सरकार के सबसे निचले पायदान पर स्थानीय सरकार होती है जो अपने ईलाके के लोगो के लिए मुलभुत आवश्यकता व जरूरतों को पूरा करती है एवं इसके लिए 1992 में 74 वें संविधान संशोधन के द्वारा स्थानीय निकाय की सरकार को संवैधानिक दर्जा देते हुए उसे शक्ति भी प्रदान की गई है, लिहाजा पाकुड़ में भी नगर परिषद इसी श्रेणी में आती है लेकिन फिलवक्त यहाँ नगर निकाय के चुनाव ना हो पाने के कारण जनप्रतिनिधि शक्ति व अधिकार विहीन हो गए हैं गौरतलब हो कि पाकुड़ पाकुड़ नगर परिषद का चुनाव वर्ष 2018 को हुआ था, जिसमें शहर के लोगों ने अपने अपने वार्ड से एक जनप्रतिनिधि का चुनाव किया था लेकिन 2018 में संपन्न हुए नगर परिषद के चुनाव के छः वर्ष बीत जाने के बाद अब तक नगर निकाय का चुनाव नही होने के कारण शहरी इलाकों के विभिन्न वार्ड के आम लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । लिहाजा शहर के विभिन्न वार्ड में लोगों के कार्य प्रभावित हो रहे हैं । वार्ड के लोगो को अपने हर संबंधित कार्य करवाने हेतु नगर परिषद कार्यालय आना पड़ता हैं जो कि पहले वे अपने वार्ड पार्षद से करा लेते थे । इस बाबत पाकुड़ नगर परिषद के प्रशासक ने बताया कि नियमावली के अनुसार तय अवधि तक चुनाव ना होने की स्थिति में नगर निकाय बोर्ड स्वतः निरस्त हो गई है । प्रशासक महोदय ने पूछने पर बताया कि ऐसी स्थिति में नगर परिषद के बोर्ड की शक्ति व अधिकार उनके पास है । दूसरी तरफ विभिन् वार्ड पार्षदों से जब इस बाबत बात की गई तो उनका कहना है कि चुनाव ना हो पाने की स्थिति में वे लोग चाहकर भी अपने वार्ड व वार्ड वासी की बेहतरी के लिए कुछ नहीं कर पा रहे हैं ।

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