राजकुमार भगत
पाकुड़ । जिले के संग्रामपुर गांव में एक भी उच्च विद्यालय का न होना एक चिंता का विषय हैं । आजादी के 78 वर्ष बाद भी यहां शिक्षा की बेहतर व्वस्था न होने से सवाल खड़ा होना लाजमी है। अधिकतर बच्चियां गांव में स्कूल न होने से आगे के पढ़ाई से वंचित रह जाती है। छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए सात किलोमीटर दूर रामचंद्रपुर या ईलामी गांव जाना पड़ता है। उक्त बातें संग्रामपुर ग्राम के समाजसेवी शहबाज आलम मैदुल इस्लाम एवं परवेज आलम ने कहीं। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन आने-जाने के मद में कम से कम 20 से ₹40 खर्च होते हैं। यह राशि कई अभिभावक वहन करने में सक्षम नहीं है। मजबूरन वह अपने बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं दिला पा रहे हैं। इसके अलावा विद्यार्थियों को आवाजाही में ही काफी समय बर्बाद हो जाता है। कभी भी कोई दुर्घटना घट सकती है। इस मामले को कोई नेता या अधिकारी गंभीरता से नहीं लिया । जब कभी गांव में हाई स्कूल के लिए नेता या फिर बड़े अधिकारी से बात की गई तो हाई स्कूल के लिए जगह नही है कहकर बात को टाल दिया जाता है। तो क्या बच्चा पढ़ाई छोड़ दे। बच्चों की भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों। क्या बच्चे 7 किलोमीटर आज के इस उमस भरी गर्मी में प्रतिदिन आ जा सकेंगे। क्या जनप्रतिनिधि इस मामले को उठाएंगे।
शाहबाज आलम प्रवेज आलम एवं मैदुल इस्लाम ने पदाधिकारी एवं जनप्रतिनिधि से अनुरोध किया है की संग्रामपुर गांव में एक उच्च विद्यालय खोलने का व्यवस्था करें ताकि बच्चियों को पढ़ने दूर न जाना पड़े।








