भाजपा को सिर्फ मुसलमानों का वोट चाहिए लीडरशिप नहीं: मोहम्मद शाकिर
झारखंड के आदीवासी, दलित व मुसलमानों के लिए संसद भवन में कभी नहीं बोले विजय हांसदा: मोहम्मद शाकिर
सतनाम सिंह
पाकुड़: असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने संताल परगना के राजमहल और गोड्डा सीट पर उम्मीदवार उतारा है। इन दोनों सीट पर अंतिम चरण में 1 जून को मतदान होना है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर शनिवार को पाकुड़ पहुंचे जहां एमआईएम जिला कार्यालय में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। जहां प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर ने बताया है कि पार्टी सुप्रीमो ने दोनों सीट पर प्रत्याशी उतारे है। उन्होंने कहा, राजमहल सीट से पार्टी ने पॉल सोरेन को अपना प्रत्याशी बनाया है। वे 11 मई को अपना नामांकन करेंगे। वहीं, गोड्डा सीट पर प्रत्याशी मंसूर आलम को मनोनीत किया गया है।राजमहल और गोड्डा संसदीय सीट पर मुस्लिम वोटरों की संख्या अच्छी-खासी है। राजमहल में यह संख्या करीब 33 प्रतिशत तो गोड्डा में 21 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि एआइएमआइएम पार्टी को मजबूती से संगठन को मजबूत करना है और चुनाव लड़कर राजमहल से पाल सोरेन एवं गोड्डा से मंसूर आलम को सांसद बनाना है। सिर्फ 5 साल जनता इन दोनों पर विश्वास करें तो 5 सालों में ही झारखंड के लोगों का तकदीर और तस्वीर दोनों बदल जाएगी। लगातार दो बार सांसद रहे विजय हांसदा ने राजमहल क्षेत्र के लोगों को सिर्फ और सिर्फ ठगा है। 5 सालों में विजय हांसदा ने संसद में सिर्फ 27 सवाल किए और 15 डिबेट में भाग लिए। उन्होंने कभी भी दलित मुस्लिम व आदिवासियों के हित में कोई भी डिबेट संसद में नहीं किए है। अगर विजय हासदा राजमहल से हैट्रिक का सपना देख रहे हैं तो वो नींद से जाग जाए क्योंकि उनको राजमहल से पछाड़ने के लिए पाल सोरेन पूरी कार्यकर्ताओं के फौजी के साथ मैदान में उतर चुके हैं। उन्होंने बताया कि पूरे जिले से करीबन 1 हजार कार्यकर्ताओं की टोली एमआईएम पार्टी का दमन थामा है।
बता दें कि इंडिया गठबंधन की ओर से राजमहल सीट से झामुमो ने विजय हांसदा और गोड्डा कांग्रेस ने प्रदीप यादव को उतारा है। मुस्लिम वोटरों को झामुमो और कांग्रेस दोनों का समर्थक माना जाता है। दूसरी तरफ एआईएमआईएम का सबसे ज्यादा फोकस मुस्लिम वोटरों पर ही रहता है। ऐसे में दोनों ही सीटों पर मुस्लिम वोटरों के ध्रुवीकरण के आसार बन सकते हैं।
राजमहल सीट पर जीत आसान नहीं|
राजमहल संसदीय सीट पहले से ही झामुमो के लिए संकट बना हुआ है। पार्टी के विधायक लोबिन हेम्ब्रम बागी होकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा कर चुके हैं। अब एआईएमआईएम भी चुनावी मैदान में हैं है, तो झामुमो के लिए इस सीट पर अपनी जीत को बरकरार रखना आसान नहीं होगा।






