सतनाम सिंह
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पेसा दिवस के अवसर पर मंगलवार पाकुड़ जिला के 113 ग्राम पंचायतों में प्रत्येक पंचायत के जनसंख्या के आधार पर सबसे बड़ी ग्राम सभा में कार्यक्रम किया गया, जिसमें पारंपरिक ग्राम सभा के पारंपरिक नेतृत्व से ग्राम प्रधान, माँझी,महतो आदि के अध्यक्षता में बैठक की गई।
पेसा दिवस पर मुख्यतः निम्न बिंदुओं पर चर्चा की गयी:-
- झारखण्ड पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) नियमावली,2022 (औपबंधिक)
- Civil Appeal No. 484 & 491 of 2006 (राकेश कुमार एवं अन्य बनाम भारत सरकार एवं अन्य) तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा WP (PIL) No. 2549/2010 (प्रभु नियारन सेमुएल सुरीन एवं अन्य बनाम भारत सरकार एवं अन्य) में पारित आदेश।
- माननीय सर्वोच्च न्यायालय तथा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा माना है कि पंचायत राज अधिनियम, 2001 पूर्ण रूप से संवैधानिक है। झारखण्ड पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) नियमावली, 2022 के औपबंधिक प्रारूप को झारखण्ड पंचायत राज अधिनियन, 2001 की धारा- 131 की उपधारा (ⅰ) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए बनाना पूर्ण रूप से वैध है।
- माननीय उच्च न्यायालय द्वारा छठी अनुसूची के “प्रावधान” और “पैटर्न” के बीच अन्तर किया गया है। केवल छठी अनुसूची के पैटर्न का ही अनुपालन किया जाना है। छठी अनुसूची में निहित प्रावधान झारखण्ड राज्य पर लागू नहीं होंगे। वास्तव में छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम के आदिवासी क्षेत्रों के लिए है।
- माननीय उच्च न्यायालय ने कहा कि “हमें झारखण्ड राज्य को PESA अधिनियम, 1996 की धारा- 4(0) के प्रावधानों को लागू करने के लिए कोई और मार्गदर्शन देने, Writof Mandamus देने का कोई कारण नहीं दिखता। झारखण्ड राज्य द्वारा झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम, 2001 को लागू करते समय PESA अधिनियम, 1996 के साथ-साथ ऊपर बताए गए सभी संवैधानिक प्रावधानों का पूरा ध्यान रखा गया है।”






