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May 6, 2026 12:56 pm

पाकुड़ विधानसभा चुनाव: शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सिंचाई जैसे मुद्दों पर मतदाताओं का ध्यान

पाकुड़ विधानसभा चुनाव: विकास के मुद्दों पर मतदाताओं का फैसला

यासिर अराफ़ात

पाकुड़ : विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है जनता के बीच पाकुड़ विधानसभा में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार किसानों की खेती के लिए सिंचाई का प्रबंध, पेयजल की समस्या, बिजली की समस्या, बढ़ती महंगाई की समस्या जैसे मुद्दों को लेकर आम लोगों में चर्चा होती हुयी नजर आ रही है.

सड़क पुल पुलिया का निर्माण अनगिनत हुए

अक्सर लोगों का कहना है कि पिछले 5 सालों के दौरान सड़क पुल पुलिया के अनगिनत काम हुए हैं. जिससे एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र जाने में लोगों को सुविधा हो रही है. सड़क पुल पुलिया के निर्माण से आम लोगों में सरकार के पक्ष में सकारात्मक नजरिया है.

बिजली व्यवस्था अभी भी है लचर

वहीं पिछले 5 सालों के दौरान बिजली व्यवस्था को लेकर आम लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि पिछले 5 सालों के दौरान कई जगहों पर नया ट्रांसफार्मर सरकार की तरफ से लगवाया गया है. कई जगहों पर बिजली पहुंचाई गई है. परंतु बिजली का नियमित ढंग से परिचालन नहीं होने से आम लोगों में खासी नाराजगी दिख रही है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से हुआ है बेहतर, सदर अस्पताल को और विकसित करने की है जरूरत

वहीं अगर बात की जाए स्वास्थ्य व्यवस्था की तो विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की तरफ से किसी तरह की स्वास्थ्य व्यवस्था न होने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है. वहीं सदर अस्पताल सोना जोड़ी में पिछले दिनों कई नये उपकरण के आने से लोगों को बेहतर सुविधा तो मिल रही है परंतु लोगों के अंदर इस बात की भी नाराजगी देखी जा रही है कि सालों बीत जाने के बावजूद अभी भी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी तथा कई उपकरण की कमी के कारण मरीज को अभी भी दूसरे प्रदेशों में रेफर कर दिया जाता है. अक्सर लोगों का कहना है कि सदर अस्पताल में और भी कई तरह के उपकरण की जरूरत है साथ ही डॉक्टरों की नियुक्ति करना भी सरकार की जिम्मेदारी है.

क्षेत्र में रोजगार न होने के कारण मजदूरों का हो रहा है अभी भी दूसरे प्रदेशों में पलायन

पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय मजदूरों का पलायन निरंतर अभी भी जारी है. इसका सबसे बड़ा कारण यह बताया जा रहा है कि पाकुड़ में किसी तरह की कोई व्यवसायिक इंडस्ट्री नहीं है. जिससे यहां के लोगों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है. पाकुड़ विधानसभा में कोयला पत्थर के कारण कुछ हद तक सिर्फ कुछ ही मजदूरों को रोजगार मिल पा रहा है. बहुत सारे ऐसे मजदूर जिनकी मजदूरी राशि ज्यादा से ज्यादा ₹350 क्षेत्र में मिलती है.मजदूरों का कहना है की मात्रा 350 रुपए में परिवार का भरण पोषण करने में काफी दिक्कत होती है इसलिए मजबूरन मजदूरों को दूसरे प्रदेशों के अंदर रोजगार की तलाश में जाना पड़ता है. इस मुद्दे को लेकर भी आम लोगों में सरकार के खिलाफ खासी नाराजगी दिख रही है.

किसानों की खेती के लिए बेहतर सिंचाई प्रबंधन न होने के कारण किसान नाराज

केंद्र सरकार की तरफ से किसानों की खेती की सिंचाई के प्रबंध के लिए मनरेगा योजना के तहत सिंचाई कूप का निर्माण, तालाब का निर्माण, तथा डोभा का निर्माण करवाया जाता है. परंतु गर्मी के सीजन में खेतों में निर्मित सभी कुंवा, तालाब तथा डोभा पूरी तरह से सूख जाते हैं. जिसके कारण किसानों को खेती करने के लिए काफी दिक्कत होती है. अक्सर किसानों का कहना है कि सरकार को किसानों की खेती के लिए सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करने हेतु डीप बोरिंग दिया जाना चाहिए. जिससे किसान खेती कर सके.

पेयजल की समस्या भी है एक बड़ा मुद्दा

पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में अभी भी कई जगहों पर पेयजल की भारी समस्या गर्मी के दिनों में देखने को मिलती है. कई ऐसे आदिवासी इलाकों में तो पेयजल की इतनी भारी किल्लत है कि तीन-चार किलोमीटर की दूरी तय करने के पश्चात ही लोगों की प्यास बुझती है. अक्सर लोगों का कहना है कि इस ऒर सरकार का ध्यान होना चाहिए.

अक्सर विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल

शिक्षा व्यवस्था पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के लिए एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है. हालांकि पिछले 5 सालों के दौरान शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने कई अच्छे कदम उठाए हैं. लेकिन अभी भी विधानसभा क्षेत्र के अक्सर स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण गरीब और मध्यम वर्गीय लोगों के बच्चों का भविष्य सवालों के घेरे में है. सरकार को विद्यालयों के अंदर शिक्षकों की नियुक्ति जरूरत के अनुसार करने की आवश्यकता है. शिक्षा व्यवस्था बेहतर न होने के कारण आम लोगों में काफी नाराजगी भी दिख रही है.

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