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May 10, 2026 3:47 am

गंदगी व दुर्गंध का हाल-ए बहाल, पाकुड़ सदर अस्पताल

दवाई की उपलब्धता के बाबजूद रोगियों को दवा उपलब्ध नही

सतनाम सिंह

राज्य सूची में दर्ज विषय स्वास्थ्य, स्वाभाविक रूप से राज्य सरकार इस विषय पर आवश्यक व तयशुदा निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होती है ताकि संबंधित राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा बहाल हो सके, परंतु जिला मुख्यालय स्थित पाकुड़ सदर अस्पताल में इन दिनों स्वास्थ्य सेवा का हाल बेहाल है । आलम ये है कि इस अस्पताल में पेरासिटामोल जैसी सामान्य दवा की सूई नहीं मिलती है तो वहीं दूसरी तरफ जीवन रक्षक दवाइयों के रहने के बाद स्टाफ की जानकारी के अभाव (अनुपस्थिति) के कारण रोगी को उपलब्ध नहीं हो पाती है । विगत 18 मई को पाकुड़ निवासी ओम कुमार ने डायलिसिस करा रहे अपने पिता की बिगड़ती हालत को देखते हुए उनको सदर अस्पताल के इमरजेन्सी वार्ड में भर्ती करवाया था, जहाँ उनके पिता की बिगड़ती हालत को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने रोगी को रेफर कर दिया, लेकिन रोगी को उसी समय तेज बुखार आने लगा जिसे देखते हुए रोगी के परिजन ने रोगी को पैरासिटामोल का सूई देने का अनुरोध किया क्योंकि रोगी के अचेतावस्था में होने के कारण रोगी को उक्त दवा का टैबलेट खिलाना संभव नही था, जबाब में उस वक्त ड्यूटी में तैनात परिचारिका ने बाहर से सूई लाने की बात कही । इस संबंध में रोगी के पुत्र ओम ने बताया कि अस्पताल की दवाई दुकान तीन बजे बंद होने के कारण वे अस्पताल के बाहर स्थित दवा दुकान गए लेकिन वहां भी उक्त सूई नहीं मिली । इसी तरह की स्थिति तीन दिन पहले भी हुई थी जब उक्त रोगी का डायलिसिस कराने के दौरान प्रेशर काफी नीचे चला गया जिसके कारण तत्काल उनको जीवन रक्षक दवा NORADRENALINE 2ML AMPOULE DISSOLVE IN 100ML NS INFUSE OVER 2HOUR देना था लेकिन ये दवा भी बाहर से ही मँगाई गई । इस मुद्दे पर सिविल सर्जन से बात करने पर उन्होंने बताया कि अस्पताल में दवा की अनुपलब्धता के बाबत अस्पताल उपाधिक्षक की ड्यूटी है कि वो इस बारे में सूचित करें, वहीं दूसरी ओर जब इस मुद्दे पर अस्पताल उपाधिक्षक डाo मनीष कुमार सिन्हा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि दवा की कमी के बारे में विधिवत रूप से वो वरीय पदाधिकारी को समय पूर्व सूचित करते रहते हैं एवं इस बात का प्रमाण दिखाते हुए उन्होंने बताया कि दवा उपलब्ध करवाने वाले टेंडर वाली कंपनी को ऑर्डर सिविल सर्जन कार्यालय से प्रेषित की जाती है । मामले की गंभीरता को समझते हुए उपाधिक्षक ने तत्काल जाँच किया तो अस्पताल में उक्त जीवन रक्षक सूई मौजूद थी । यहां ध्यान देने वाली बात है कि अगर अस्पताल की दवा दुकान जो तीन बजे बंद हो जाती है वो खुली रहती तो उक्त दवा मिल जाती । इस बाबत उपाधिक्षक महोदय ने बताया कि इमरजेन्सी दवा, दुकान के बंद होने की स्थिति में भी मिल जाएँगी, पर सवाल वही कि दुकान के बंद रहने की स्थिति में परिजन दवा ढूँढेगा या फिर दुकानदार को ? स्वच्छता की बात करें तो अस्पताल के पीछे के कैंपस में गंदगी की भी स्थिति बनी हुई है । इमरजेन्सी वार्ड के पीछे के गलियारे में गंदगी का अंबार पड़ा है जहाँ की बदबू वार्ड के अंदर फैली रहती है । इस मुद्दे पर उपाधिक्षक ने बताया कि इस बारे में उनके द्वारा पूर्व में ही कैंपस की सफाई के निर्देश दिए गए हैं जबकि सामने की सफाई हो चुकी है । उपाधिक्षक महोदय ने बताया कि इस हेतु विभाग को लिखा गया है, जल्द ही पीछे के कैंपस की सफाई करवा दी जाएगी ।

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