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August 9, 2026 8:20 pm

जल-जंगल-जमीन की संस्कृति से सजा पाकुड़, ट्राइबल फैशन शो ने मोहा मन।

विश्व आदिवासी दिवस पर रविन्द्र भवन में दिखी आदिवासी विरासत की रंगीन तस्वीर, उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान और लाभुकों को मिली योजनाओं की सौगात

पाकुड़। विश्व आदिवासी दिवस पर रविवार को रविन्द्र भवन टाउन हॉल में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत का रंग देखने को मिला। जिला स्तरीय समारोह में संथाली और पहाड़िया नृत्य-संगीत के साथ ट्राइबल फैशन शो ने ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे छात्र-छात्राओं ने झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विविधता को मंच पर जीवंत कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त मेघा भारद्वाज समेत अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। समारोह को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा कि आदिवासी समाज का जीवन प्रकृति से गहराई से जुड़ा है। जल, जंगल और जमीन के साथ संतुलित जीवन तथा पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करना आज की बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से उतना ही संसाधन लेने की सीख आदिवासी समाज से मिलती है, जितना वह दोबारा पूरा कर सके। यही वास्तविक सतत विकास है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली और गांवों से शहरों की ओर पलायन के कारण नई पीढ़ी धीरे-धीरे पारंपरिक संस्कृति और ज्ञान से दूर हो रही है। ऐसे में पारंपरिक खान-पान, ज्ञान, चिकित्सा पद्धतियों और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने की जरूरत है। बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों और शिक्षकों के प्रयासों को भी सराहा।सांसद प्रतिनिधि श्याम यादव ने कहा कि देश की प्राचीन संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज का योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, फूलो-झानो और तिलका मांझी जैसे वीरों का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने आदिवासी बच्चों को अधिक से अधिक शिक्षित करने पर जोर दिया। नगर परिषद अध्यक्ष सबरी पाल ने कहा कि आदिवासी संस्कृति, भाषा, कला, वेशभूषा और परंपराएं झारखंड की पहचान हैं। इन्हें संरक्षित कर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उप विकास आयुक्त अरविन्द कुमार लाल ने भी आदिवासी संस्कृति और विरासत के संरक्षण में समाज की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

नृत्य-संगीत से लेकर फैशन शो तक दिखी संस्कृति की झलक

समारोह में संथाली सांस्कृतिक कार्यक्रम, पहाड़िया नृत्य और ट्राइबल फैशन शो आकर्षण का केंद्र रहे। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अपनी संस्कृति और समाज से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। पारंपरिक पोशाकों में सजे प्रतिभागियों ने आदिवासी जीवनशैली और सांस्कृतिक विविधता की मनमोहक तस्वीर पेश की।

मेहनत करने वालों को सम्मान, लाभुकों को मिली सौगात

कार्यक्रम में जनजातीय परगनैत, ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि, एएनएम-जीएनएम, सहिया और सेविका समेत समुदाय के हित में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रशस्ति पत्र और कॉफी मग देकर सम्मानित किया गया। वहीं विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभुकों के बीच वन पट्टा और साइकिल वितरित की गई। अबुआ आवास और जनमन आवास योजना के लाभुकों को आवास की चाबी भी सौंपी गई।समारोह में एसपी अनुदीप सिंह, डीडीसी अरविन्द कुमार लाल, आईटीडीए निदेशक अरुण कुमार एक्का, एडीएम जेम्स सुरीन, एसडीओ साइमन मरांडी, सीजेएम संजीत कुमार चन्द्र समेत बड़ी संख्या में अधिकारी, जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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