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May 6, 2026 10:33 am

अभी भी बहुत सारी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के लोग

यासिर अराफ़ात।

पाकुड़ : पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री आलमगीर आलम के अथक प्रयास से सड़कों का एक तरह से माया जाल बिछ गया. कई पुलिया का निर्माण भी किया गया. कम्युनिकेशन का इतना शानदार काम इससे पहले शायद ही कभी हुआ हो. चुंकि विधानसभा चुनाव बहुत करीब है, सिर्फ चंद महीने ही बचे हैं. इस विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कई जगहों पर मंत्री आलमगीर आलम सहित कई नेताओं के नाम पर चर्चा भी शुरू हो चुकी है,चर्चा इस बात की भी हो रही है कि मंत्री आलमगीर आलम ने मंत्री बनने के बाद पाकुड़ विधानसभा के लिए क्या-क्या काम किये. निश्चित तौर पर उनके विकास कार्यों की सराहना भी हो रही है. लेकिन अभी भी बहुत सारे काम करना बाकी है. पाकुड़ विधानसभा का सबसे पुराना मुद्दा बिजली और पानी का रहा है. जिसमें लोगों की नाराजगी देखी जा रही है. पाकुड़ विधानसभा में बिजली पानी की व्यवस्था को बेहतर करने की जरूरत है,दूसरा मुद्दा पाकुड़ विधानसभा के अंतर्गत एक अच्छा सारे सुविधा वाला अस्पताल की वर्षों से मांग रही है, इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता है कि पाकुड़ सदर अस्पताल सोना जोड़ी की इलाज व्यवस्था पूर्व की भांति बेहतर हुई है. लेकिन जिस तरह पश्चिम बंगाल में हॉस्पिटल में सेवाएं दी जाती है उस तर्ज पर अभी भी काम करना बाकी है. अस्पताल को बेहतर करने के लिए और भी बहुत सारे डॉक्टर की जरूरत है. साथ ही और भी बहुत सारी मशीनरी की भी जरूरत है. सदर अस्पताल छोड़कर पाकुड़ विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बहाल नहीं है, जिसकी चर्चाएं भी ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही है, कहते हैं भारत गांव के दिलों में बसता है, गांव मजबूत होगा तो पूरा देश मजबूत होगा, इसी कड़ी के तहत गांव को मजबूत बनाने हेतु गांव में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना बेहद जरूरी है. शिक्षा व्यवस्था को लेकर गांव में इस बात की चर्चा है कि पहले से ज्यादा सरकारी विद्यालयों की हालत बदली है. लेकिन अभी भी कई विद्यालय शिक्षकों की कमी के कारण जूझ रहे हैं. हालांकि हाल ही के दिनों में मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के द्वारा शिक्षक बहाली को लेकर पहल की गई है जिस बात की सराहना हो रही है. लोगों के अंदर इस बात की खुशी देखने को मिल रही है कि बहुत जल्द विद्यालयों के अंदर शिक्षकों की बहाली हो जाएगी और क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था और बेहतर होगी. पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र में दो बड़ी-बड़ी कोल माइंस कंपनिया चल रही है. इसके बारे में लोगों के अंदर भारी गुस्सा भी देखा जा रहा है. खासकर युवाओं का मानना है कि कोल माइन्स कंपनी में स्थानीय लोगों को रोजगार देना चाहिए था. लेकिन कोल माइन्स कंपनी द्वारा स्थानीय लोगों की अनदेखी की गई. किसानों और मजदूरों के लिए अभी भी रोजगार की समस्या बहुत ज्यादा है. किसानों को जरूरत के मुताबिक खाद बीज उपलब्ध कराने की जरूरत है. साथ ही किसानों के लिए खेती हेतु सिंचाई का बेहतर प्रबंधन करने की जरूरत है. किसानों के लिए कई जन कल्याणकारी योजनाएं हर साल होती है जैसे सिंचाई कूप,तालाब डोभा आदी. परंतु भीषण गर्मी का महीना जब होता है उस समय सभी तालाब नदी नाला कुआं सूख जाते हैं. किसानों की खेती के लिए डीप बोरिंग ज्यादा से ज्यादा उपलब्ध कराने की जरूरत है. पाकुड़ विधानसभा के मजदूरों का पलायन अभी भी जारी है. पलायन दो कारण से देखा जा रहा है. पहला कारण पाकुड़ क्षेत्र में काम की कमी. दूसरा कारण काम अगर है भी तो यहां पर मजदूरों को उस तरह की आमदनी नहीं हो पाती है. जो आमदनी दूसरे प्रदेशों में होती है.इसीलिए बेहतर आमदनी के लिए पाकुड़ विधानसभा के मजदूर केरल मुंबई चेन्नई आदि शहरों में जाकर काम करने चले जाते हैं.सरकार को इन मजदूरों के बारे में भी सोचने की बेहद जरूरत है.

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